Page 62 - Mann Ki Baat (Hindi)
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िनथीचरो, सजािटी सामान औरो उप्योिी अच्छा तरोीका है, इससे सम्मान वमलता
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िस्तएँ बनाते हैं वजनमें उप्योविता औरो है।” अवधक से अवधक ्यिाओं को इस
स्िदेशी वडिाइन का अनूठा मेल होता क्त्र में लाने के वलए िे साल में कई बारो
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है। मुफ्त प्वशक्ण प्दान करोती हैं। िे बताती
मािमारोेट रोामथारोवसएम जैसी हैं- “प्वशक्ण के बाद, िे जो कुछ भी
उद्वम्यों ने वदखा्या है वक कैसे ्य े बनाते हैं, हम उसे खरोीद लेते हैं। उन्हें
वश्कप समुदा्यों को आवथमाक रूप स े विपणन की वचंता करोने की िरूरोत नहीं
सशक्त बना सकते हैं। कारोीिरोों को है। हम उसका ध््यान रोखते हैं।”
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सिवठत करोके, ित्श्िक-स्तरो परो वमली मबणपुर में पुष्पककृबर्: परम्परा और
जानकारोी से प्ेररोत नए वडिाइनों को पेश िाज़ार का सिम
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करोके औरो विपणन की विम्मदारोी लेकरो, मवणपरो में चोखोने ककृचेना न े
उन्होंने कारोीिरोों की आ्य में उ्कलखनी्य पारोम्पररोक ककृवष ज्ान को आधुवनक
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िवद् की है औरो पारोम्पररोक कौशलों को पुष्पककृवष के साथ वमलाकरो खेती को एक
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उनका सम्मान िापस वदला्या है। न्या रूप वद्या है। पारोम्पररोक ककृवष में
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िेरोिॉल विले के एक छोटे से िाि िहरोी जिें जमाए पररोिारो से आने िाली
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परोबंि की रोहने िाली मािमारोेट के उद्म ककृचेना कहती हैं, “मैंने इसकी खवब्या ँ
का मुख््य उद्श््य आजीविका सृजन करोना औरो कवम्याँ दोनों दखीं। जहाँ पारोम्पररोक
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है। िे कहती हैं, “पहले कुछ कारोीिरो ककृवष श्म-प्धान है औरो अक्सरो कम
मुत्श्कल से 2,500-3,000 रुप्ये प्वत लाभ देती है, िहीं पुष्पककृवष हमारोे क्त्र के
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माह कमा पाते थे। हमारोे साथ काम करोने वलए बेहतरो आवथमाक अिसरो प्दान करोती
के बाद, उनमें से कई अब वन्यवमत रूप है। िूल उिाना हमेशा से मेरोा जुनून रोहा
से 20,000-30,000 रुप्ये कमा रोहे हैं। है, औरो पुष्पककृवष में विस्तारो करोने से मुझ े
हस्तवश्कप पैसा कमाने का एक बहुत अपनी ककृवष विरोासत का सम्मान करोत े
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