Page 60 - Mann Ki Baat (Hindi)
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परम्परा से पररवत्यन तक
समुदा्यों को सशक्त िनाते भारोती्य कला औरो कौशल
भारोत की पारोम्पररोक कलाएँ औरो सांस्ककृवतक प्थाएँ न केिल पहचान औरो विरोासत
की प्तीक हैं, बत््कक आवथमाक सशक्तीकरोण के शत्क्तशाली साधन भी हैं। हाल ही
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में प्साररोत 'मन की बात' के एक एवपसोड में प्धानमत्री नरोन्द्र मोदी ने ऐसे तीन
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प्ेरोणादा्यक प््यासों परो प्काश डाला - आंध्र प्देश की नरोसापरोम लेस कला, बांस औरो
लकिी के हस्तवश्कपों का सतत उद्मों में रूपांतरोण औरो मवणपरो में पुष्पककृवष पहल। ्य े
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सभी कहावन्याँ दशामाती हैं वक कैसे ‘परोम्परोा’ निाचारो, बािारो तक पहँच औरो सरोकारो के
सह्योि से समािेशी आवथमाक विकास का एक शत्क्तशाली माध््यम बन जाती है।
नरसापुरम लेस को जीआई र्ैि की मान्यता
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नरोसापरोम लेस, वजसे ‘नरोसापरो क्रोवश्या लेस’ के नाम से भी जाना जाता है,
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आंध्र प्देश के पत्श्चम िोदािरोी क्त्र में त्स्थत नरोसापरो की एक पारोम्पररोक हस्तवनवममात
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क्रोवश्या लेस कला है, वजसकी विरोासत 150 िषषों से अवधक परोानी है। ्यह कला
मुख््य रूप से स्थानी्य वकसान समुदा्यों की मवहला कारोीिरोों द्ारोा की जाती है। इसमें
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महीन सूती, कभी-कभी रोेशम ्या वसंथवटक धािों औरो नािक क्रोवश्या सुइ्यों का
उप्योि करोके जवटल पुष्प, ज््यावमती्य औरो बूटा रूपांकन बनाए जाते हैं, वजन्हें बाद में
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