Page 56 - Mann Ki Baat (Hindi)
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                                    एंटीबा्योवटक ने आधवनक वचवक्वसा म क्रांवतकारोी
                                                               ें
                                पररोितमान वक्या है। लवकन उनके दुरुप्योि औरो अ्व्यवधक
                                              े
                                उप्योि के कारोण उनकी प्भािशीलता तिी से कम होती
                                                            े
                                जा रोही है, वजससे एंटीमाइक्रोवब्यल प्वतरोोध (AMR)
                                    ै
                                का ित्श्िक संकट िहरोा रोहा है। प्वतरोोधी संक्रमणों के
                                कारोण अस्पताल म भतथी रोहने की अिवध बढ़ जाती है,
                                              ें
                                स्िास््थ््य-सिा की लाित बढ़ती है औरो ्यह जानलिा
                                        े
                                                                      े
                                तक सावबत होते ह वजससे सक्रामक रोोिों से लिने म  ें
                                              ैं
                                                      ं
                                अब तक हुई प्िवत ़ितरोे म है।
                                                    ें
                                    भारोती्य आ्यविमाज्ान अनुसंधान पररोषद (ICMR)
                                              ु
                                                        ें
                                की ररोपोट्ट के अनुसारो, भारोत म आमतौरो परो उप्योि
                                की जाने िाली एंटीबा्योवटक दिाओं का कमिोरो ्या
                                                    ं
                                बेअसरो होने का स्तरो अ्व्यत वचंताजनक हो ि्या है।
                                                       टै
                                ई.  कोलाई,  क्लेत््धसएला,  स्टविलोकोकस  ऑररो्यस
                                औरो सा्कमोनेला जैसे बैक्टीररो्या से होने िाले सामान््य
                                                                     ं
                                                ें
                                                      ं
          डॉ. राजीव िहल         संक्रमणों के उपचारो म प्थम पत्क्त ही नहीं, दूसरोी पत्क्त
                                                                 ैं
            महावनदेशक           के एंटीबा्योवटक्स भी असरो नहीं करो पा रोहे ह। इनका
       भारोती्य आ्यविमाज्ान अनुसंधान   ्यह प्वतरोोध केिल अस्पतालों तक सीवमत नहीं है बत््कक
              ु
       पररोषद (ICMR) तथा सवचि,   समुदा्यों के स्तरो परो भी देखा जा रोहा है। संस्थान की
        स्िास््थ््य अनुसंधान विभाि  ररोपोट्ट म ‘अवतम विक्कप’ मानी जाने िाली दिाओं के
                                      ें
                                         ं
                                                    ं
                                प्वत भी बढ़ता प्वतरोोध रोेखावकत वक्या ि्या है वजसके
                                                               ैं
       एंर्ीिायोडर्क            कारोण उपचारो के विक्कप सीवमत हो जाते ह औरो बीमारोी
                                                             ृ
                                की अिवध लम्बी होने, लाित बढ़ने तथा म्व्यु का जोवखम
                                बढ़ने की आशंका रोहती है।
       दवाओं के                     एंटीबा्योवटक दिाओं का उप्योि ही एंटीबा्योवटक
                                                     ें
                                प्वतरोोध  के  प्मुख  कारोणों  म  से  एक  माना  ि्या  है।
                                                ु
       उपयोग ्में               एंटीबा्योवटक  के  अनवचत  उप्योि  के  कारोण  कुछ  े
                                बैक्टीररो्या नष्ट होने के बजा्य शरोीरो म जीवित रोह जात
                                                           ें
                                 ैं
       सावधानी और               ह। ्यही जीवित बचे बैक्टीररो्या, अपने को नई पररोत्स्थवत
                                                                      ैं
                                के अनुरूप ढाल करो, दिा के प्वतरोोधी बन जाते ह।
                                सम्य बीतने के साथ इन प्वतरोोधी बैक्टीररो्या की संख््या
                                                                 ैं
                                           ै
       उत्तरदाडयत्व की          बढ़ने  औरो  िलने  से  ऐसे  संक्रमण  होते  ह  वजनका  ें
                                इलाज करोना औरो अवधक कवठन हो जाता है। असल म
                                एंटीबा्योवटक का दुरुप्योि, बैक्टीररो्या को उन दिाओं
       अपीि                     से ही लिने को ‘प्वशवक्त’ करो देता है जो कभी उन्ह  ें
                                मारो डालती थीं।
                                    एंटीबा्योवटक दिाओं का अनवचत उप्योि कई तरोह
                                                        ु
                                                        ू
                                से होता है, जैसे सदथी-िुक़ोाम, फ्ल ्या कोविड-19 जैसी
                                                                  ें
                                              ें
                                िा्यरोल बीमाररो्यों म एंटीबा्योवटक लेना; लक्णों म सुधारो
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