Page 37 - Mann Ki Baat (Hindi)
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श्धदों औरो रोोिाना इस्तमाल होने िाली
श्धदािली वसखाती थीं औरो बढ़ते-बढ़त े
्यह बाका्यदा वशक्ा संस्थान के रूप म ें
ें
विकवसत हो ि्या। 2014 म औपचाररोक
प्बंधन सवमवत िवठत की िई वजसका
ृ
नेत्वि मुझे अथामात शवशधरो नािरोाजप्पा
ं
को सौंपा ि्या औरो उसम वसद्वलिेश
ें
बी.आरो., सुनील िािस्करो, शवशधरो
मंडरोािी तथा नािरोाज रोाि को भी वल्या
ु
ं
ि्या था। पचास से ज़््यादा िॉलवट्यरो औरो
वशवक्काओं के आ जाने से इस प््यास को
ृ
बल वमला; इनका नेत्वि रूपा एच.जी. न े
संभाला जो संस्थान के वनमामाण के वलए
अथक प््यास करो रोही थीं।
मातृभार्ा म साक्र होना िच्च का
ें
े
जन्मबसद्ध अबधकार
केपीएसडी की पक्की मान््यता ह ै
वक मातृभाषा म साक्रो होना ्यानी पढ़ना-
ें
वलखना, सीखना बच् का जन्मवसद्
े
अवधकारो है। इसकी व््यिस्था करोना
माता-वपता औरो समुदा्यों की विम्मदारोी ह ै
े
कृ
तावक अप्िासी भारोती्य अपनी सांस्कवतक
विरोासत औरो प्ाचीन परोम्परोाओं स े
ु
जि रोह। म्क्यों-मान््यताओं, भािनाओं
ू
ें
े
औरो पहचान की अवभव््यत्क्त का सबस े
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