Page 40 - Mann Ki Baat (Hindi)
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पीए्म सूय्य घर ्मुफ्त डिजिी योजना




                                                       िदलती विंदवग्याँ






























            मवणपुरो की हरोी-भरोी िावद्याँ वजतनी खूबसूरोत हैं, िहाँ के दूरोदरोाि इलाक़ोों में विंदिी
        उतनी ही चुनौवत्यों से भरोी है। पहािों के बीच बसे कई िाँिों में, जहाँ सूरोज सबसे पहले

        वनकलता है, विडम्बना ्यह थी वक िहाँ शाम होते ही अंधेरोा छा जाता था। वबजली की कमी
        न वसफ़्फ घरोों को अंधेरोे में रोखती थी बत््कक स्िास््थ््य औरो रोोिी-रोोटी परो भी िहरोा असरो
        डालती थी। लेवकन कहते हैं न वक अँधेरोे को कोसने से बेहतरो है एक दी्या जलाना।

        मवणपुरो के ्यिा मोइरोांिथेम सेठ ने वब्ककुल ्यही वक्या।
                 ु
            मोइरोांिथेम सेठ ने वग्ड की वबजली का इंतिारो करोने के बजा्य सूरोज की रोोशनी
        को ही अपनी ताक़ोत बना वल्या। आज उनकी औरो सरोकारो की कोवशशों से मवणपुरो के
        सुदूरो इलाक़ोों में एक नई क्रांवत आ रोही है।

            एक स्थानीय समाधान की खोज
            मोइरोांिथेम सेठ उस पीढ़ी से आते हैं वजसने बचपन में वबजली की भारोी वक़ो्कलत
        देखी है। उनके वलए सौरो ऊजामा वसफ़्फ एक तकनीक नहीं बत््कक िरूरोत थी। उन्हें इस



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