Page 36 - Mann Ki Baat (Hindi)
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दुबई की कन्नड पाठशाले के प््यासों परो प्काश
ं
डालने के वलए माननी्य प्धानमत्री के प्वत हावदमाक आभारो
ैं
व््यक्त करोते ह क््योंवक इसके माध््यम से विश्िभरो के
कन्नड प्िावस्यों के समपमाण भाि का पररोच्य वमलता
है। श्ी मोदी के श्धद वकसी एक संस्थान की मान््यता
को ही व््यक्त नहीं करोते बत््कक भौिोवलक दूररो्यों के
कृ
बािजूद सांस्कवतक, भाषा्यी औरो भािना्वमक सम्बंधों
को मिबूत बनाने म भारोती्यों के सतत प््यासों को भी
ें
ैं
उजािरो करोते ह।
भारोत से बाहरो औरो खासकरो दुबई जैसे विश्ि-
स्तरोी्य महानिरो म रोहने िाले कन्नड लोिों के वलए
ें
्यह मान््यता जबदमास्त प्ो्वसाहन देने िाली है। इसस े
ें
हम पक्की तस्कली हो जाती है वक अपनी मातृभाषा को
ं
सरोक्ण देकरो उसे नई पीढ़ी तक पहँचाने की वदशा म ें
ु
शबशधर नािराजप्पा वकए जा रोहे हमारोे प््यासों को रोाष्ट्ी्य स्तरो परो देखा जा
ू
अध््यक् रोहा है तथा उनका महत्ति समझते हुए उनका भरोपरो
कन्नड वमतारु सम्मान भी वक्या जा रोहा है।
स्युक्त अरोब अमीरोात
ं
दिई की कन्नड पाठशाले का जन्म
ु
कन्नड पाठशाले दुबई (KPSD) का जन्म,
ु
कन्नि पाठशाि े साधारोण-सी लिने िाली परो िम्भीरो वचंता से जिी, इस
ु
सोच के आधारो परो हुआ वक हम ्यह कैसे सवनत्श्चत
ें
ें
ू
करो वक हमारोे बच्े विदेशी भवम म पलने औरो बि होन े
े
सीमाओं से परोे भाषा, परो भी अपनी जिों से वकस प्कारो जुडे रोह सकते ह?
ैं
कनामाटक से जाने िाले पररोिारो काम-धंधे की िजह स े
जड़ें औरो पहचान ्या वनजी अिसरोों के कारोण जैसे-जैसे स्युक्त अरोब
ं
अमीरोात म बसते िए, िैसे-िैसे ही उनके अवभभािकों
ें
ने देखा वक उनके बच् धीरोे-धीरोे कन्नड भाषा से दरो
ू
े
ैं
होते जा रोहे ह।
ें
शुरू म तो स्थान प्ाप्त करोने की चुनौती सामन े
आई वजसे जेएसएस प्ाइिेट स्कूल के उदारो सह्योि
ु
ें
से सत्तूरो मठ के परोम पूज््य वशिरोावत्र दवशकद्र स्िामीजी
े
की देखरोेख म हल वक्या ि्या तथा डॉ. प्भाकरो कोरो े
ें
के प्बंधन िाले वब्किा इवड्या स्कूल औरो ए.एस.ए.पी.
ं
ू
(ASAP) ट्टसमा के सौजन््य से जिह भी वमल िई।
ें
शुरुआत सप्ताहांत म अनौपचाररोक बैठकों स े
की िई वजनम समवथमात िॉलवट्यरो कन्नड भाषा के
ें
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