Page 39 - Mann Ki Baat (Hindi)
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आधारो परो चल रोहा है। हमारोा मानना
ु
है वक ्यिा पीढ़ी को भाषा्यी ज्ान देना
हमारोा नैवतक कतमाव््य है। तभी न तो कोई
िीस ली जाती है औरो न ही वशवक्काए ँ
कोई िेतन लेती हैं। वशक्कों की ्यह टीम
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परोे वनस्िाथमा भाि के साथ 12 िषमा से भी
ज़््यादा सम्य से कन्नड भाषा की सिा
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में परोे समपमाण औरो ििमा के साथ लिी
है। इस िषमा की वशवक्काओं में काव््या,
वबंदू, वदव््या, चेतना, विनुथा, मनसा हिडे,
े
मीना, रूपा िोरोाटे, मंजुला, वत्रिेणी,
रोवक्ता, स्िावत, न्यना, अनुपमा, अचमाना,
क्कपा, मंडेला, मनसा विन्या तथा पहल े
के िषषों में ्योिदान करो चुकी कई अन््य
वशवक्काएँ हैं।
बवदेश म कन्नड पढ़ाने की ज़््यादातरो ‘घरोेलू भाषा’ बनकरो रोह जाती है।
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चोुनौबतया ँ सम्य का अभाि, सीवमत रूप से सप्ताहांत
विदेशी धरोती परो कन्नड पढ़ाना म कक्ाएँ लिाना, विदेशी अध््य्यन की
ें
अपने-आप म अनूठी चुनौती है। बच् े सुविधाओं के अभाि तथा बहु-सांस्कवतक
ें
कृ
शुरू से अंग्ेिी, अरोबी औरो अन््य ित्श्िक पररोिेश म लम्ब सम्य तक रुवच बनाए
ै
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ें
भाषाओं का माहौल देखते ह औरो कन्नड रोखने जैसी चुनौवत्यों से वनपटने के वलए
ैं
निाचारो खोजना िरूरोी हो जाता है। इन
चुनौवत्यों से वनपटने के वलए वशवक्काए ँ
ं
कहानी, नाटक, सिीत औरो सांस्कवतक
कृ
ैं
विधाओं की मदद लेती ह।
साथ्यकता की नई भावना
माननी्य प्धानमत्री के उ्कलख स े
ं
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केपीएसडी म नई ऊजामा औरो उद्श््य भाि
का संचारो हुआ है। इससे वशवक्काओं
का संक्कप औरो दृढ़ हुआ है, अवभभािक
ैं
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प्ररोत हुए ह तथा विद्ाथथी भी अपनी भाषा
औरो विरोासत के प्वत िौरोि का अनुभि
करोने लिे ह।
ैं
इससे ्यही िोरोदारो संदेश वमलता
है- ‘जहाँ भारतीय रहते ह वहाँ भारतीय
ैं
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भार्ाएँ भी रहती ह।’
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