Page 35 - Mann Ki Baat (Hindi)
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          िरूरोत होती है तथा ्यही िुण िैज्ावनक   आप देखिे वक समूचा पररोिारो रुवच लेता
          अनुसंधान के वलए भी बहुत िरूरोी होते   है औरो पूरोी तरोह का्यमाक्रम से जुि जाता
          हैं।                              है।  ्यह  कहना  कतई  िलत  नहीं  होिा
              इन कक्ाओं में मंच परो प्स्तुवत देने   वक िीतांजवल IISc ने समृद् वहंदुस्तानी
          की कला वसखाने परो भी पूरोा ध््यान वद्या   शास्त्री्य संिीत का प्सारो IISc के लोिों
          जाता है, तथा ्यह भी समझा्या जाता है     में करोके इस संस्थान को सांस्कवतक रूप
                                                                   कृ
          वक  कैसे  अपना  आ्वमविश्िास  वदखाएँ,   से जीिंत बना वद्या है।
          श्ोताओं ्या दशमाकों से आँखें कैसे वमलाएँ   िीता  के  अनुसारो,  “इस  पूरोी
          औरो उनसे इंटरोेक्ट कैसे करोें। ्ये सभी
          पहलू  व््यत्क्त्वि  औरो  प्ोिेशनल  उन्नवत   सिलता का मुख््य आधारो संिीत के प्वत
          के वलए अहम हैं।                   िहरोा लिाि है। संिीत कोई अवतररोक्त बोझ
              िीता का मानना है वक ‘िीतांजवल   नहीं लिना चावहए। ्यह तो कलाकारोों की
          IISc एक विशाल पररोिारो है।’ हम अपने   अवभव््यत्क्त ्या जीिनशैली के सहज अंि
           ु
          ग्प में न तो स्पधामा करोते हैं औरो न ही   जैसा होना चावहए।” हरो रोोि नई औरो
          तुलना  करोते  हैं।  हमारोी  प्स्तुवत  देखने   कवठन चुनौवत्यों से जूझने िाले विद्ावथमा्यों
                              े
          परो कभी-कभी आपको लििा वक वपता-    औरो शोधकतामाओं के वलए ऐसी जिह पाना
          पुत्री ्या वपता-पुत्र परोिाममेंस दे रोहे हैं ्या   मुत्श्कल होता है। हाँ, IISc में ्यह मौजूद
          लििा वक माताएँ का्यमाक्रम करो रोही हैं।   है औरो इसका नाम है िीतांजवल IISc.
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