Page 41 - Mann Ki Baat (Hindi)
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काम की प्ेरोणा कहाँ से वमली, इस बारोे
          में िे बताते हैं:
              “मैंने  बचपन  में  देखा  है  वक  कैसे
          िाँि िाले वबजली के वबना संघषमा करोते
          थे।  पररोिारो,  स्कूल  औरो  स्िास््थ््य  केंद्र
          अक्सरो अंधेरोे में काम करोने को मजबूरो
          थे। मुझे महसूस हुआ वक वग्ड के विस्तारो
          का  इंतिारो  करोना  कािी  नहीं  है-  हमें
          एक  स्थानी्य  औरो  वटकाऊ  समाधान
          (Sustainable Solution) की िरूरोत
          थी। सौरो ऊजामा सबसे व््यािहाररोक औरो
          सशक्त विक्कप लिा क््योंवक इसे िहीं पैदा
          वक्या जा सकता था जहाँ लोि रोहते हैं।”
              चोुनौबतयों से लड़कर बमली कामयािी  “शुरुआती  चुनौवत्याँ  बहुत  बिी
              मवणपुरो  के  पहािी  रोास्तों  परो  काम   थीं- जािरूकता की कमी औरो पैसों की
          करोना  आसान  नहीं  था।  मोइरोांिथेम  ने   तंिी। कई िाँि िाले शुरू में शक करोते
          जब  सोलरो  पैनल  लिाने  की  शुरुआत   थे, उन्हें मनाने के वलए धै्यमा औरो भरोोसा
          की तो आरोम्भ में उन्हें लोिों की शंका   का्यम  करोना  पिा।  तकनीकी  तौरो  परो
          औरो तकनीकी वदक्क़ोतों का सामना करोना   पहािी इलाक़ोों में उपकरोण ले जाना औरो
          पिा। अपनी ्यात्रा के शुरुआती वदनों के   सही इंस्टॉलेशन करोना भी मुत्श्कल था।
          बारोे में िे कहते हैं:            लेवकन हरो सिल इंस्टॉलेशन ने हमें आिे


























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