Page 32 - Mann Ki Baat (Hindi)
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बिलुरू के भारोती्य विज्ान संस्थान (IISc) में
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दस िषमा पहले िवठत वहंदुस्तानी शास्त्री्य संिीत ग्प
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िीतांजवल IISc का आदशमा िाक््य ्यानी मोटो है ‘संिीत
सबसे ऊपरो’। ्यह मोटो आज भी इस ग्प की नींि की
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भांवत ही है जो IISc में संिीत औरो संस्कवत की परोम्परोा
कृ
को वनरोंतरो आिे बढ़ा रोहा है। िीता अनंत ने शास्त्री्य
संिीत के प्वत अपने प्म को साझा करोने की वदशा
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में महज चारो विद्ावथमा्यों को लेकरो जो साधारोण-सी
शुरूआत की थी िही आज 4 से 85 िषमा तक के सभी
संिीत प्ेवम्यों के बिे समुदा्य का रूप ले चुकी है।
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िीतांजवल IISc ग्प की संस्थापक िीता अनंत ने
IISc की त्रैमावसक पवत्रका कनेक्ट को एक बारो वदए
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इंटरोव््य में कहा था, “संिीत हमारोे ग्प में सभी के वलए
सिवोपररो है। हम संिीत के प्वत रुवच औरो लिन के
अलािा वकसी अन््य बात परो ध््यान नहीं देते। इसके
ं
प्रो. िोबवंदन रिराजन अवतररोक्त कोई औरो चीि हमारोे वलए खास महत्ति नहीं
वनदेशक
भारोती्य विज्ान संस्थान रोखती- न तो आ्यु, न स्त्री-पुरुष का भेदभाि, न वकसी
(IISc) का धममा औरो न ही ्यह बात वक आप पहले से संिीत के
बारोे में क््या औरो वकतना जानते हैं।”
िीतांजवल IISc के सदस््यों में विद्ाथथी, वशक्क,
गीतांजडि उनके पवत-पत्ी औरो बच् शावमल हैं जो अलि-
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अलि पृष्ठभवम से आते हैं। अपने वपता की रोेलिे की
IISc नौकरोी के कारोण देश के विवभन्न भािों में रोहने के
बाद करोीब 30 िषमा पहले िीता IISc बेंिलुरू आई थीं
प््यारो विखेरोता जब उनके पवत अनंत रोामस्िामी िहाँ वशक्क वन्युक्त
ं
होकरो आए थे, िे अब िहीं वसविल इंजीवन्यररोि विभाि
के अध््यक् हैं। लिातारो बदलािों के दौरो में िीता को
संगीत ग्रुप िरोा भी आभास नहीं था वक इस कैम्पस में उनका
जमाि इतना िहरोा हो जाएिा। प्ेरोणा का एक ही स्ोत
ं
था, औरो िह था- सिीत के प्वत जुनून की हद तक
उनका लिाि।
िीता ने 2001 में अपने घरो में ही थोिे से
विद्ावथमा्यों को लेकरो वहंदुस्तानी संिीत की कक्ाएँ शुरू
की थीं। उनका कहना है, “अपने िुरू के आशीिामाद औरो
पररोिारोजनों के सह्योि से अपने कुछेक विद्ावथमा्यों के
साथ ही हमने िीतांजवल IISc ग्प शुरू वक्या था। बस,
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्यहीं से हमारोी ्यात्रा शुरू हुई थी।”
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