Page 60 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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               गरौरया से लरौटि्री प्रकति की मुस्ान
                    ै




           आप सभी लोगों ने बचपन में
          गौिैया को अपने छत पि, पडों       भाित के हदल में गौिैया आकाश
                                  े
         पि चिकते िुए जरि-जरि देखा       में उडने वाली छोटी-छोटी हचहडयों
          िोगा। गौिैया को तहमल औि        से किीं अहधिक मित्व िखती िै। व  े
          मलयालम में कुरुवी, तेलुगु में   घि, समुदाय औि सामाहजक जीवन
         हपचुका औि कन्नड में ग्बी के
                               ु
         नाम से जाना जाता िै। िि भाषा,   की प्रतीक िैं, जो देश के सांसकृहतक
          संसकृहत में गौिैया को लेकि      ताने-बाने में बुनी िुई िैं। गौिैया
          हकसस-किानी सुनाए जाते िैं।     की आबादी में हगिावट केवल एक
                े
          िमािे आस-पास जैव-हवहवधिता      क्हणक हजज्ाासा निीं िै। यि एक
          को बनाए िखने में गौिैया का
          एक बिुत मित्वपण्य योगदान      गमभीि मुद्ा िै, जो गिन पया्यविणीय
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                   े
          िोता िै, लहकन आज शििों में     बदलाव औि बढ़ते शििीकिण की
          बडी मबशकल से गौिैया हदखती       चुनौहतयों का संकेत देता िै। इस
               ु
         िै। बढ़ते शििीकिण की वजि स  े
                                                          ु
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              गौिैया िमसे दि चली         प्रकाि, गौिैया को पिानी यादों के
                    गई िै।                तौि पि सँजोने से किीं अहधिक
                                                      ं
                                        इसके हनिंति सिक्ण के प्रयासों की
             -प्रधिानमंत्ी निेनद्र मोदी, ‘मन की   आवशयकता िै।
                        बात’ समबोधिन में






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