Page 56 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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लुप्त होि्री गरौरया और शहर्रीकरण
ै
एक अंतिीन नृतय का प्रदश्यन
मिे पयािे देशवाहसयो, आप सभी किते हदलली के िलचल भिे ट्रैहफक
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लोगों ने बचपन में गौिेया या
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Sparrow को अपने घि की छत पि, पडों जाम के बीच– िमािी पयािी ‘गौिैया’
पि चिकते िुए ज़रि देखा िोगा। िि की चिक एक अंतिंग, आिामदायक
भाषा, संसकृहत में गौिेया को लेकि वाताविण प्रदान किती ििी िै। यि
हकसस-किानी सुनाए जाते िैं। िमाि े उसकी िलकी-फुलकी चिचिािट िी
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आसपास Biodiversity को बनाए िखन े थी, जो सुबि की िवा, शिि की सडकों
में गौिेया का एक बिुत मित्वपण्य औि पिानी हदलली के प्राचीन समािकों
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योगदान िोता िै, लहकन आज शििों
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में बडी मबशकल से गौिेया हदखती िै। में गँजती ििी िै, लहकन जैसे-जैसे साल
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बढ़ते शििीकिण की वजि से गौिेया बीतते गए, यि सिीली धिुन शांत िोती
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िमसे दि चली गई िैं। जा ििी िै।
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-प्रधिानमंत्ी निनद्र मोदी एक समय था, जब सुबि से शाम
(‘मन की बात’ समबोधिन में ) तक शिि की सडकों पि गौिैया को
उडते िुए देखा जाता था औि उनकी
चिचिािट की आवाज़ पिे मािौल में
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गँजती थी। पिानी हदलली की पािमपरिक
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िवहलयों में ििने वाले परिवािों के
आँगन में अ्सि गौिैया का घोंसला
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िोता था। उनकी चिक, चाय की सुगधि
औि वयसत बाज़ािों की आवाज़ के साथ
हमलकि वाताविण को जीवंत बनाती
थी। परिवत्यनशीलता की प्रतीक गौिैया
शििी जीवन की जहटलताओं को सुकून
में बदलने वाली एक छोटी-सी प्राणी थी।
गौिैया, हवशेष रप से घिेलू गौिैया
(पासि रोमबसटकस) एक सािसी पक्ी
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िै, हजसने सहदयों से उललखनीय रप
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