Page 62 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
P. 62
ममट््री से मोहब्बि!
ृ
प्रकति को संवारने वाले नायक
मन की बात के में प्धानमंत्ी श्ी नर्द्र मो्दी ने उन लोगों और समूहों की प्रक कहावनरों को पेश
े
े
े
वकरा, जो ्देश और समाज में बवमसाल ब्दलावि लाने का जजबा रखते हैं। चाहे विह ‘सविच् भारत अवभरान’
े
ु
े
ु
हो रा ‘एक पड मां के नाम’ मवहम हो, वजसने पूरे ्देश को एकजुट वकरा और ववि्देशों तक प्रणा पहँचाई, रा
वफर बेकार समझे जाने विाले कचरे को काम का सामान बनाने की इनोविेवटवि कोवशशें –
रे कहावनराँ भारतीर समाज की ताक़त और हौसले को व्दखाती हैं। मुमबई की अक्षरा और प्कृवत
का कपडे के ्ोटे टुकडों से फैशन आइटम बनाना, कानपुर पलॉगस्य का गंगा की सफाई और कचरे को
े
रीसाइवकल करना, वबहार की मवहलाओं का बडे पैमाने पर पड लगाना और असम की इवतशा का स्ानीर
लोगों के सा् वमलकर अरुणाचल की सांगती घाटी को साफ बनाने का प्रास – हर पहल न वसर््क परा्यविरण
को बेहतर बना रही है, बनलक ्दूसरों के वलए वमसाल भी पेश कर रही है। मन की बात में प्धानमंत्ी द्ारा
इन नारकों का वज़रि, एक वविकवसत भारत त्ा समाविेशी और सतत समाज के वनमा्यण में उनके रोग्दान
को रेखावकत करता है।
ं
ु
“सुबह 11:00 बजे हमें पता लगा वक प्धानमंत्ी नरेंद्र मो्दी जी ने हमारे ग्रप को अपने ‘मन की बात’
कार्यरिम में उललख वकरा है। रे एक सपना पूरा होने जैसा ्ा करोंवक प्धानमंत्ी मो्दीजी के
े
टविीट को ्देख करके ही हमने रे ग्रप सटाट्ट वकरा ्ा। पलॉवगंग विड्ट करा होता है? रे भी
ु
मुझे उनके टविीट के थ्ू ही पता लगा ्ा। एक इतना बडा इंसान, जो प्धानमंत्ी
है इस ्देश का, जब विो झुक करके कचरा उ्ठा सकता है तो हम करों नहीं
कर सकते?
कानपुर पलॉगस्य के सा् हमारा सपना है वक हम कानपुर को उत्तर प््देश
ं
का इ्दौर बनाएँ। पूरा इवडरा ऐसा हो सकता है, जो वक अपने कूडे का
ं
वनसतारण करे। हम तो रही वविज़न रखते हैं वक पूरा इवडरा, पूरी तरह
ं
ै
से सविच् हो, सबको विेसट मनेजमेंट पता हो, ससटेनेबल हवबटस पता
हों। रही हमारा सपना है।”
-संजीविनी शमा्य, कानपुर पलॉगस्य ग्रप की संस्ापक
ु
58
58

