Page 59 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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गौिैया औि कई अनय पक्ी संयोग, क्ेत् के हलए फीरि जोडने या ‘जंगली कोने’
की िक्ा औि सामाहजक समपक्फ के बनाने जैसे सिल कदम भी मित्वपूण्य
हलए अपने गीतों पि भिोसा किते िैं। अंति ला सकते िैं।
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िालाहक शििी जीवन का धवहन प्रदूषण, गौिैया एक बाि हफि शिि को
जो यातायात, हनमा्यण औि औद्ोहगक अपने गीतों से भि दे, इसके हलए
गहतहवहधियों से उतपन्न िोता िै, एक- शििी हनवाहसयों को मज़बूत इिादे औि
दूसिे को सुनने की उनकी क्मता में संवेदना के साथ काम किना िोगा।
रुकावट रालता िै। अधययनों से पता जैव हवहवधिता को प्राथहमकता देने वाल े
चला िै हक शोि के बावजूद गौिैया ऊँच े वाताविण को प्रोतसािन देकि, िरित
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सवि में गाने के हलए मज़बि िोती िै, सथान बनाकि औि पया्यविण-अनुकूल
हजससे उसे तनाव िो सकता िै औि प्रथाओं को बढ़ावा देकि िम उस सद भाव
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संयोग वयविाि बाहधित िो सकता िै। को हफि से जगा सकते िैं, जो पिल े
इन चुनौहतयों के जवाब में शििी कभी शिि के परिदृशय में पनपा था।
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क्त्ों में गौिैया की आबादी में हगिावट चुनौती हसफ्फ गौिैया को वापस लाने की
को बचाने के हलए हवहभन्न प्रयास हकए निीं िै, बबलक सभी जीवों के अंतस्यमबंधि
गए िैं। ‘पक्ी-अनुकूल’ शििी हनयोजन को पिचानने औि एक ऐसे भहवष्य का
जैसी समुदाय-संचाहलत पिलों में गहत पोषण किने की िै, जिाँ शिि प्रकृहत के
आई िै। इनमें छत पि बगीचे बनाना, साथ उतने िी जीवंत िों, हजतने लोगों के
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देसी पड तथा झाहडयाँ लगाना औि साथ िोते िैं। ऐसे प्रयासों से यि शिि
कीटनाशकों का उपयोग कम किना वासतव में अपनी समपूण्य गरिमा के साथ
शाहमल िै। साव्यजहनक पाकगों में पहक्यों गौिैया की चिचिा से गुजयामान िोगा।
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