Page 58 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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एक अनय मित्वपण्य कािक खाद्
                                                           ू
                                          स्ोतों में बदलाव िै। गौिैया बीज, कीड़े

                                          औि  मानव  भोजन  के  अवशेषों  पि
                                               पलती  िैं।  िालाहक  आधिुहनक
                                                            ँ
                                                शिि ने अपनी खाद् आपहत्य में
                                                                   ू
                                               नाटकीय रप से बदलाव हकया
                                               िै। शििी भूदृशय में उपयोग हकए
                                                 जाने  वाले  कीटनाशक  औि
                                                 िासायहनक  उव्यिक  कीडों
                                                 की  उपल्धिता  को  सीहमत
                                               किते िैं, जो युवा पहक्यों के हलए
                                          प्राथहमक भोजन स्ोत िैं। इसके अलावा
         े
        पडों  से  भिा  िुआ  था,  जो  अनहगनत   इन  हदनों  सथानीय  बाज़ाि  में  पिले  स  े
        पहक्यों  का  भिण-पोषण  किते  थे,   पैक हकए गए, जो प्रसंसकृत खाद् पदाथ्य
         े
        तज़ी  से  कंरिीट,  सटील  औि  काँच  स  े  िैं, वे विी पोषण मूलय प्रदान निीं किते
        प्रहतसथाहपत हकए जा ििे िैं। छोट़े बगीचे,   िैं,  जो  प्राकृहतक  खाद्  स्ोत  (अनाज)
        घि के हपछले हिसस औि छत की जगि     किते थे।
                       े
        गौिैया का हनवास सथान िुआ किती िैं,    इसके  अलावा  तज़ी  से  िो  ििा
                                                           े
        मगि शििी फैलाव में ये जगिें भी लुपत   शििीकिण भी गौिैया की संवाद किन  े
        िोकि िि गई िैं।                   की  क्मता  को  प्रभाहवत  किता  िै।


























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