Page 51 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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हजससे गहतशील जातीय समबंधिों
वाले समाज का हनमा्यण िुआ, जो
आज भी हवकहसत िो ििा िै।
इरो-गयाना के ्लम
े
ं
हशवचिण ने अपनी पीएचरी
थीहसस में बताया हक हब्हटश
गयाना (1838-1917) में आने वाल े
भाितीय जयादाति भाित के
े
समान भौगोहलक क्त्ों से आए
ु
थे, खासतौि पि संय्त प्रात
ं
औि हबिाि से, जिाँ 83 प्रहतशत
ू
से अहधिक हिनद औि 17 प्रहतशत
से कम मुसलमान थे। तटीय
गयाना के लगभग िि गाँव में
मबनदि तथा मबसजद मौजूद िैं
औि फगवा तथा दीवाली के
तयोिाि पि िाष्ट्ीय अवकाश
िोता िै औि इन अवसिों पि बड़े
आयोजन िोते िैं। इन समािोिों
में देश भि के सभी जातीय
ू
समिों की भागीदािी िोती िै।
सकूलों में िंगोली प्रदश्यनी तथा
प्रहतयोहगताएँ, प्रदश्यन कला मंच
ं
शो, औि इरो-गयाना के गीत
तथा नृतय प्रहतयोहगताएँ उन कई
तिीकों में से िैं, हजनसे भाितीय
उपबसथहत समकालीन गयाना
समाज में वयापत िै।
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