Page 48 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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गयाना में भारि्रीय


                 186 वर्षों का संघर््श और सफलिा





                                          मूल का िोने का संकेत देता िै। इसके
                                          अलावा 96 प्रहतशत से अहधिक लोग या
                                          तो  अहधिकांश  भाितीय  पिमपिाओं  का

                                          पालन  किते  िैं  या  प्रमुख  हिनद  तथा
                                                                   ू
                                          मबसलम िीहत-रिवाज़ों औि जीवन शैली
                                           ु
                                          को अपनाते िैं।
                                              इरो-गयाना के इहतिासकाि तोता
                                               ं
                रॉ. सीता शाि िोथ          मंगि (2014) ने पवदी भाितीय अप्रवासन
                                                       ू
           हशक्क, लेखक औि सांसकृहतक       पि किा हक कहठनाइयाँ, नुकसान औि
                  मानवहवज्ाानी
                                          अवज्ाा, भाितीय हगिहमहटया अप्रवाहसयों
                                          के  अनुभवों  का  हिससा  थीं,  जिाँ  कई

                                          लोग  मुखय  रप  से  अपनी  ताकत,
                                          धिीिज,  िीहत-रिवाज़ों,  पिमपिाओं  औि
            गयाना में भाितीयों की सव-पिचान   दाहयतवों के माधयम से बने ििे, हजसस  े

        में,  यिाँ  तक  हक  उनकी  भाषाओं  के   हमतवयहयता,  वाहणजय  औि  उनकी
        खतम िो जाने के बाद भी हपछले 186 वषगों   उपलब्धियों  ने  उनमें  गव्य  की  भावना
                                                   ं
        में बिुत कम बदलाव आया िै। गयाना   पैदा  की।  इरो-गयाना  ने  अपने  नाम,
                                                             ु
                                            ं
        में बसे भाितीय मूल के लोग विाँ सबस  े  वयजन, धिम्य, संगीत, अनष्ठान, तयोिाि
                                                                   ु
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        बड़े जातीय समि का प्रहतहनहधितव कित  े  औि  प्राकृहतक  उपचाि  -  आयवदेहदक
        िैं, हजनकी आबादी 40 प्रहतशत िोने का   तथा  आधयाबतमक  को  बिकिाि  िखा
        अनुमान िै। िाल िी में िुए एक सवदेक्ण   िै। उनिोंने िामलीला जैसे लोक िंगमंच
        से पता चला िै हक 98 प्रहतशत से अहधिक   के  पिलुओं,  संगीत  पिमपिाओं,  लोक

        इरो-गयाना  के  लोगों  ने  पिले  गयाना   नृतयों औि भाितीय फैशन के पिलुओं
         ं
        हनवासी के रप में अपनी पिचान बनाई   को  भी  जयादाति  बिकिाि  िखा  औि
        िै  औि  उनका  नाम  उनके  भाितीय   पुनजदीहवत हकया िै।


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