Page 43 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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हकताबों वाली एक इमाित निीं िै। यि हलखी िै, तो मैं उनकी इस यात्ा को
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ज्ाान औि हवद्ा की देवी माँ सिसवती समझ जाती िँ औि उसे अनुभव किती
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का हनवास सथान िै। आप यिाँ सीखते िँ, तो ये अपने आप में बिुत बडा ज्ाान िै।
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िैं, सृजक बनते िैं औि आप वासतव प्रतयक पुसतक हकसी-न-हकसी हवषय को
में इसका आनंद ले सकते िैं। यि युवा साझा किती िै। इसहलए पुसतकालय
िचनाकािों के हलए एक प्रयोगशाला िै। को ज्ाान का सागि किा जाता िै।
यि ज्ाान का घि िै, ्योंहक हकताबें कभी मिी ये बातें सुनकि वे भी
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भी हमत् का अभाव निीं िोने देतीं। िमें पुसतकालय के मित्व को मान गए।
अलग-अलग आयु वग्य के हलए अलग- मैं औि बात किना चािती थी,
अलग प्रकाि की हकताबें िखनी चाहिए। लहकन मैंने ऐसा किना टाल हदया,
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िि हकसी की रुहच अलग िोती िै। सभी ्योंहक मिे हदमाग में पिले से िी कोई
अनुभव हकसी एक वयब्त को उसके औि योजना चल ििी थी।
जीवनकाल में निीं हमलते िोंगे, लेहकन कुछ िी मिीनों में उस गाँव में
जब लोग हकसी हवषय पि पुसतक पढ़ते एक छोटी-सी अचछी इमाित बन गई,
िैं तो वे उनकी कलपना किने में सक्म हजसमें उर्म फ़नदीचि औि एक बडा
बनते िैं। बगीचा था। आिमभ किने के हलए मैंन े
उदाििण के हलए मैं माउंट एविेसट सभी पुसतकों को वयब्तगत रप से चुना
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पि कभी निीं चढ़ी िँ, लहकन जब मैं था औि इसमें कई हवषय शाहमल थ–
हकसी ऐसे वयब्त के बािे में हकताब सािहसक तथा िचनातमक गहतहवहधियाँ,
पढ़ती िँ हजसने माउंट एविेसट पि चढ़ाई पिहलयाँ औि भाितीय इहतिास पि
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की िै औि उसके बािे में एक पुसतक किाहनयाँ आहद।
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