Page 44 - Mann Ki Baat Hindi
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महान भाि्त़ीय परिवाि
े
एकतिटा और वैक्वक प्रणटा की परमपरटा
भटारति एक देश के तिौर पर दुडनयटा
भर में अपने भटाई-चटारे और मटानवीय
मूलयों के डलए जटानटा जटातिटा है और
उसकटा सममटान डकयटा जटातिटा है। पूरी
दुडनयटा के िटारे में हमटारी समझ ‘वसुधैव
कु्ुमिकम’ के तिौर पर है। यह िटाति
मटानवतिटा के इडतिहटास में दज्ष कई
उदटाहरणों से सप्् होतिी है। यह समझ
भटारति की सडदयों पुरटानी समृद् संसकडति
कृ
और पटाररवटाररक मूलयों की परमपरटा से
आतिी है। ये मूलय ितिटातिे हैं डक पररवटार
केवल कुछ सदसयों कटा समूह नहीं है,
जहटाँ खून कटा रर्तिटा है और एक ही
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