Page 41 - Mann Ki Baat Hindi
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“इस िटार मैंने गणतिंत्र डदवस
          की परि देखी। परि देखनटा मेरटा
               े
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            ु
          िहति  िड़टा  सपनटा  ्थटा।  लगभग
          ग्टाउंि जीरो से आए लोगों को
          मौकटा नहीं डमलतिटा, लडकन इस
                          े
          सरकटार ने पद्म श्ी को सटामटानय
          जनमटानस कटा पद्म िनटा डदयटा है।
          मोदी जी ने हमें रटा्ट्रीय समटारोह
          कटा डहससटा िनने कटा मौकटा डदयटा
          है। यह एक सप्् संदेश है डक
          जि जमीनी-सतिर के लोग इन रटा्ट्रीय उतसव और अनय महतवपण्ष कटाय्षकम में आतिे हैं, तिो
                                                       ू
          इसकटा मतिलि है डक लोगों की िटाति सुनी जटा रही है, उनकी परवटाह की जटा रही है, और उनके
                                                            ं
                                            ं
          िटारे में सोचटा जटा रहटा है। मैं सूचनटा और प्सटारण मत्रटालय के दो केंद्रीय मडत्रयों - श्ी अक्वनी
           ै
          व्णव जी और िॉ. एल. मुरुगन सर से भी डमलटा। वे हमटारे िहति करीि ्थे, और उनहोंन  े
                                                       ु
                           हमटारटा गम्षजोशी से सवटागति डकयटा, हमटारी िटाति सुनी, और हमटारे सटा्थ
                           अचछी िटातिचीति की। हमने उनके सटा्थ सि कुछ ऐसे शेयर डकयटा
                           जैसे हम डमडनस्र से नहीं, िकलक उन लोगों से िटाति कर रहे हों जो
                           हमटारी परवटाह कर रहे हैं।”

                                                                    ू
                                                   -जावेद अहमद ्टाक, जमम-क्मीर
                                                (मन की िात के 14वें संसकरण में चचात्त)

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