Page 47 - Mann Ki Baat Hindi
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डक हर िच्टा, मडहलटा और डदवयटांग वयक्ति
          हमटारे संगठन के मटाधयम से समटाज कटा
          एक अहम सदसय िन सके। यही हमटारटा
          डमशन है।”
              इन प्रक कहटाडनयों में एक ऐसे गटाँव
                  े
          से  जो  एक  पररवटार  की  तिरह  सटा्थ  में
          खटानटा खटातिटा है, एक ऐसे नौजवटान तिक जो
          अपनी कमयुडन्ी को िदल देतिटा है, एक
          ऐसी संस्थटा तिक जो िच्ों, मडहलटाओं और
          िुजुगषों की देखभटाल के डलए समडप्षति है
          - हम समटाज के डलए डिनटा डकसी सवटा्थ्ष
          के सेवटा करने के भटारति के हमेशटा रहने
          वटाले  आदश्ष  की  जीतिी-जटागतिी  भटावनटा
          देखतिे हैं। भटारतिीय पररवटार पद्डति केवल
          खून के रर्तिों तिक ही सीडमति नहीं है, यह
          िड़े पैमटाने पर समटाज तिक फैलटा हुआ है,
          जो डजममेदटारी, दयटा और डमल कर आगे
          िढ़ने को िढ़टावटा देतिटा है। एकतिटा और सेवटा
          की यह सदटा-सव्षदटा रहने वटाली संसकडति
                                      कृ
          ही  भटारति  को  केवल  एक  देश  ही  नहीं,
          िकलक एक ‘पररवटार’ और दुडनयटा के डलए
              े
          एक प्रणटा स्ोति के रूप में डनरंतिर कटायम
          रखतिी है।


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