Page 48 - Mann Ki Baat Hindi
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सिहदों के पाि




                                 अपनी जड़ों को सींचतिटा भटारतिीय समुदटाय






























            कलपनटा कीडजए डक आप भटारति से हजटारों मील दूर डकसी दूसरे देश में हों, लेडकन
                               कृ
        वहटाँ कटा वटातिटावरण और सटांसकडतिक पररदृ्य आपको अपने घर जैसटा एहसटास डदलटाए!
        मलेडशयटा में िसने वटालटा भटारतिीय समुदटाय कुछ ऐसटा ही करर्मटा कर रहटा है। वे न डसफ़्फ

        अपनी प्गडति की रटाह िनटा रहे हैं, िकलक अपनी डवरटासति को भी पूरी डशद्ति के सटा्थ संजोए
        हुए हैं। इस कोडशश में ‘मलेडशयटा-इंडियटा हेरर्ेज सोसटाइ्ी’ एक मजिति सतिमभ िनकर
                                                           ू
        उभरी है, डजसके संस्थटापक-अधयक्ष श्ी प्भटाकरन नटायर हैं।
            श्ी नटायर कटा मटाननटा है डक डवरटासति को सहेजनटा डसफ़्फ पुरटानी यटादों में जीनटा नहीं है,
        िकलक यह दो देशों के िीच गहरटा और िौडद्क रर्तिटा िनटाने की एक कोडशश है।

            इंसाबनयत की रूहानी बवरासत
                                       कृ
            इस सोसटाइ्ी की शुरुआति डसफ़्फ सटांसकडतिक कटाय्षकमों के डलए नहीं हुई ्थी, िकलक इसके
        पीछे एक िहति िड़ी सोच ्थी। श्ी प्भटाकरन नटायर ितिटातिे हैं डक उनकटा शुरुआतिी मकसद
                  ु
        यूनेसको (UNESCO) में एक नई श्णी िनवटानटा ्थटा- ‘मटानवतिटा की आधयटाकतमक डवरटासति’
                                  े
        (Spiritual Heritage of Mankind)। अपनी प्रणटा के िटारे में ितिटातिे हुए वे कहतिे हैं:
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