Page 40 - Mann Ki Baat Hindi
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‘मन की बात’ से गणतंत्र दिवस समारोह तक


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         िश क प्ेरणािायक नागदरकों का सम्ान


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          जि माननीय प्रधानमत्री ‘मन की िात’ में बकसी नागररक के िारे में चचात्त करते हैं,
          तो यह ‘राष्ट्ीय पहचान’ का प्ल िन जाता है। अ्लग-अ्लग एबपसोि में बदखाए गए
          कई जमीनी िद्लाव ्लाने वा्लों के ब्लए यह पहचान ब्ॉिकास्ट से भी आगे िढ़ गई,
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          कयोंबक उनह गणतंत्र बदवस समारोह में बवशेष अबतबि के तौर पर आमबत्रत बकया
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          गया। केंद्ीय सूचना एवं प्रसारण, र्लवे, और इ्लकट्ॉबनकस एवं सूचना प्रौद्योबगकी
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          मत्री श्ी अक्वनी वष्णव और सूचना एवं प्रसारण तिा संसदीय कायत्त मत्रा्लय में
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          राजय मत्री िॉ. ए्ल. मुरुगन के साि उनकी िातचीत में सि को साि ्लेकर च्लन  े
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          वा्ले शासन की भावना बदखी, जहाँ जो जमीनी-सतर पर चुपचाप काम कर रहे हैं,
          उनह राष्ट्ीय उतसव के केंद् में ्लाया जाता है।
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            “यह एक शटानदटार अनुभव रहटा है। सरकटार के मत्री जमीन से जड़े हुए हैं। वटासतिव में
        हमें इस तिरह के समटावेशन की जरूरति है। मोदी जी की सरकटार ने ऐसटा ही डकयटा है। मैं
                         िहति खुश हँ ्योंडक अपने सपोटस्ष कॅररयर के डपछले 33 सटालों में
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                         मैंने अि तिक 32 अतिररटा्ट्रीय मिल जीतिे हैं, लडकन इस िटार ही
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                         मुझे भटारति सरकटार से अचछी तिटारीफ डमली। मैं मत्रटालय, व्णव जी,
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                         दूरदश्षन और आकटाशवटाणी कटा डदल से शडकयटा अदटा करतिटा हँ।”
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                                 -जॉिी मैथय, केर्ल (मन की िात के 120वें संसकरण में चचात्त)
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