Page 39 - Mann Ki Baat Hindi
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सुकून से िैठकर अपनी ‘आतमटा’ स  े  डलयटा जटा रहटा है। मंच िदल गयटा है,

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          ‘संवटाद’ कर सकें।                 लडकन  मूल  भटावनटा  वही  है।  'भजन
              पीढ़ीगत  दूररयों  को  बम्टाता   ्लडिंग' महज एक ट्रेंि नहीं, िकलक

          संगीत                             एक 'आधयटाकतमक पुनजटा्षगरण' है। यह

              'भजन ्लडिंग' की सिसे िड़ी      इस िटाति कटा प्तिीक है डक भटारति कटा

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          खिसूरतिी इसकी समटावडशतिटा है। इन   युवटा डकतिनटा भी आधडनक ्यों न हो
          भजन संधयटाओं में पीडढ़यों कटा डमलन   जटाए, उसके पैर अपनी संसककृडति की
          होतिटा है। यह एक पटाररवटाररक उतसव   जमीन पर ही ड्के रहेंगे। तिनमयतिटा,

          है जहटाँ दटादी और पोतिटा एक ही धुन   लगन और लय के सटा्थ जि हजटारों

          पर झूमतिे नजर आतिे हैं।           युवटा एक सवर में गटातिे हैं, तिो वह केवल

              प्धटानमत्री मोदी ने सही ही कहटा   गटायन नहीं होतिटा, िकलक एक नए और
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          है  डक  भक्ति  को  हलकेपन  में  नहीं   सश्ति भटारति कटा उदघोर होतिटा है।


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