Page 41 - MANN KI BAAT (Hindi)
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पर  आयोखजत  खकया  जाता  है,  खजसमें   उनके संरक्षण के प्रखत कत्षवय की भािना

          आधयाकतमक शुखद्ध की तलाश में लािों   भी लाती है। कई आधयाकतमक गुरु और
          श्द्धालु आते हैं। िाराणसी के घाटों पर   पया्षिरणखिद् नखियों को प्रिूषण तथा क्षरण
          िाह संसकार और तटों पर प्राथ्षना करने   से बचाने की खहमायत करते हैं। नमाखम
          जैसे अनुषठान धाखम्षक प्रथाओं में नखियों   गंगे पररयोजना जैसे अखभयान गंगा की
          की अखभन्न भूखमका को िशा्षते हैं।   पखित्रता को बहाल करने के उद्शय से
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              भारत में अनेक तयोहार जैसे सय्ष िि   हैं, जो इस बात पर ज़ोर िेते हैं खक इन
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          को समखप्षत छठ पूजा, पुषकर झील के तट   नखियों की ििभाल करना आधयाकतमक
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          पर आयोखजत होने िाला पुषकर मेला और
          कई अनय तयोहार नखियों में और उनके   और  पाररकसथखतक  खजममेिारी  है।  यह
          आस-पास  आयोखजत  खकए  जाते  हैं,  जो   मानयता खक नखियों को नुकसान पहुँचाना
          भारतीय परमपराओं में उनके महत्ि को   ईशिर का अनािर करने के समान है,
          िशा्षते हैं। ये तयोहार लोगों को आसथा और   इन महत्िपूण्ष जल खनकायों को संरखक्षत
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          परमपरा के सामखहक उतसिों में एक साथ   करने के प्रयासों को बल िेती है। भारत
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          लाकर  सामाखजक  मेलजोल,  सि भाि    में नखियाँ केिल भौखतक अकसतति नहीं हैं;
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          और एकता को बढ़ाते हैं।             िे आधयाकतमकता, संसकखत और मानि
                नखियों  के  प्रखत  श्द्धा  अपने  साथ   जीिन को जोड़ने िाले सेतु हैं।


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