Page 42 - MANN KI BAAT (Hindi)
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हदव्य नहदयों
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क हकनार आयोजजत िोने िाले त्ोिार
“कुमभ, पुष्करर और गंगा सागर रेला - िरारे ्े प्व्म िरारे साराहजक रेलजोल को, सद ्भा्व
को, एकता को बढ़ाने ्वाले प्व्म िैं। ्े प्व्म भारत के लोगों को भारत की परमपराओं से जोड़ते
िैं और जैसे िरारे िासत्रों ने संसार रें िर्म, अथ्म, कार, रोक्, चारों पर बल हद्ा िै, ्वैसे िी
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िरारे प्व्म और परमपराएँ - आध्ाशतरक, साराहजक, सांसकहतक और आहथ्मक िर पक् को भी
सिकत करते िैं।”
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- प्धानमांत्री नरन्द्र मोिी (‘मन की बात’ समबोधन में)
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भारत रें नहद्ों के इद्म-हगद्म रनाए जाने ्वाले त्ोिारों का गिरा सांसकहतक, िाहर्मक और
पाररशसथहतक रित््व िै। नहद्ों को पह्वत्र रानते िुए हिनदू िर्म रें उनिें दे्वी स्वरूप राना जाता
िै और ्ि भी रान्ता िै हक ्े आतरा को िुद्ध करती िैं और जी्वन को बनाए रखती िैं। कई
त्ोिारों रें नहद्ों का आभार व्कत हक्ा जाता िै, इनसे आिी्वा्मद राँगा जाता िै और इनके
हकनारे अनुष््ान हक्ा जाता िै।
कुमभ महोतसव
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12 साल के चक्र में चार बार आ्ोदजत होन वाला कुमभ मला भारत के चार पदवत्र सिानों
पर होता ह- हररविार में गगा निी पर, उज्न में दशप्ा निी पर, नादसक में गोिावरी निी
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के दकनार और प््ागराज में गगा निी, ्मुना निी और पौरादणक सरसवती के सगम पर।
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