Page 39 - MANN KI BAAT (Hindi)
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          निी और चीन के लोग हुआंग हे निी के   के खलए इंद्र ने 360 खिनों तक ित्रासुर के
          खकनारे फले-फूले। भारत में खसंधु घाटी   खिलाफ युद्ध लड़ा। अंततः उनहोंने उसके

          सभयता खसंधु के खकनारे पनपी, जबखक   99 खकलों को तोड़ खिया और उसे उस
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          िखिक सभयता गंगा के खकनारे समृद्ध   िज्र से मार खगराया जो ऋखष िधीखच की
          हुई। जीिन को बनाए रिने में नखियों   हखडियों से बना था।
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          की महत्िपूण्ष भूखमका को ििते हुए यह   खहनिू  पौराखणक  कथाओं  में  कुछ
          कोई आशचय्ष की बात नहीं है।        नखियों  को  खिवय  प्राखणयों  का  अितार
              ऋगिेि  के  आरकमभक  भजन        माना जाता है। कभी कौखशकी के नाम से
          अकसर खसंधु और सरसिती का गुणगान    जानी जाने िाली कोसी निी को सतयिती
          करते हैं, जबखक बाि के भजन अकसर    की मृतयु के बाि उनका पररिखत्षत रूप
          गंगा की मखहमा के बारे में हैं। खहनिू रिंथों   माना  जाता  है।  श्द्धेय  ऋखष  खिशिाखमत्र
          में  अकसर  सपत  खसंधु  या  सात  पखित्र   की बड़ी बहन सतयिती कुशक िंश से
          नखियों की अिधारणा का उललेि खकया   थीं। इसी तरह गंगा को ििी के रूप में
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          गया है। सबसे अखधक उद्धृत नखियाँ हैं–   माना जाता है और अपने सांसाररक रूप
          खसंधु, सरसिती, गंगा, यमुना, गोिािरी,   में िह राजा शांतनु की पत्ी तथा भीषम
          नम्षिा और कािेरी।                 की माँ थीं।

              ऋगिेि की एक कहानी बताती है खक    खहनिू पौराखणक कथाओं के अनुसार
          सूिे के प्रतीक ित्रासुर ने कैसे नखियों   माना जाता है खक गंगा सिग्ष से उतरी
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          को  कैि  कर  खलया।  उनहें  मुकत  करने   थी ताखक मृतकों की आतमाओं को शुद्ध




























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