Page 58 - Mann Ki Baat - Hindi
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ड़दनों में से एक बन गया। अमृतसर के   ड़क अब सवतंत्रता याचना से नहीं, संघष्द
        जड़लयाँवाला बाग में हजारों लोग रौलेट   से ही ड़मलेगी।
        ए्ट के ड़वरोध में एकत्र हुए थे। ड़बना   जड़लयाँवाला बाग अब क्कूरता का
        ड़कसी  चेतावनी  के  जनरल  रायर  न  े  प्तीक नहीं, बकलक भारत के अपराजेय
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        सड़नकों को ड़नहतथ लोगों पर गोड़लया  ँ  संकलप का प्तीक बन गया।
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        चलाने  का  आदेश  दे  ड़दया।  हज़ार  स  े  दारी  माच्द  (1930)  :  नमक  से  हुई
        अड़धक लोग मारे गए।                 प्ड़तरोध की शुरुआत
            यह केवल ड़हंसा नहीं थी, यह भारत     11  साल  बाद,  12  माच्द  1930  को,

        की  आतमा  को  कुचलने  की  ड़ब्रड़टश   गाँधीजी ने अहमदाबाद के साबरमती
        सरकार  की  कोड़शश  थी,  लेड़कन         आश्रम  से  24  ड़दन  की  यात्रा  शुरू
        हुआ इसके ठीक उलट। रवीनद्रनाथ          की  और  6  अप्ल  को  दांरी  तट
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        टैगोर ने अपनी ‘नाइटहर’ सममान          पर पहुँचे। उनहोंने समुद्र से नमक
        लौटा ड़दया, गाँधीजी ने असहयोग           उठाकर ड़ब्रड़टश कानून को तोड़ा।
        आंदोलन की घोषणा कर दी, और              यह काय्द प्तीकातमक था, लेड़कन
        देशभर में यह समझ पुखता हो गई

















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