Page 56 - Mann Ki Baat - Hindi
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जञागृतत कञा प्रतीक अप्रैल



                            चम्ािण, जलियाँवािा बाग औि दांडी माच्क





                                                ै
                                              अप्ल  का  महीना  भारत  के
                                   ै
           मेरे पयारे देशवाड़सयो, आज अप्ल
                                                   ं
           का  आड़खरी  रड़ववार  है।  कु्  ही   सवतंत्रता  सग्राम  में  एक  ड़वशेष  सथान
        ड़दनों में मई का महीना शुरू हो रहा है।   रखता  है।  यह  न  केवल  ऐड़तहाड़सक
        मैं  आपको  आज  से  करीब  108  साल   घटनाओं का प्तीक है, बकलक एक ऐस  े
                          ू
        पहले  लेकर  चलता  हँ।  साल  1917,   युग की शुरुआत का गवाह है ड़जसन  े
           ै
        अप्ल और मई के यही दो महीने - देश
        में आज़ादी की एक अनोखी लड़ाई लड़ी   भारत के सवतंत्रता आंदोलन की ड़दशा
        जा रही थी।                        ही बदल दी। चाहे वह चमपारण सतयाग्रह
                   - प्धानमंत्री नरेनद्र मोदी   (1917) हो, ड़जसमें गाँधीजी ने पहली बार
               (‘मन की बात’ समबोधन में )  अड़हंसातमक प्ड़तकार का सिल प्योग
                                          ड़कया,  या  जड़लयाँवाला  बाग  नरसंहार
                                                           े
                                          (1919), ड़जसने औपड़नवड़शक शासन की
                                          क्कूरता को उजागर कर ड़दया, या ड़िर
                                            ं
                                          दारी माच्द (1930), ड़जसने ड़ब्रड़टश कानून
                                          की नींव को ड़हला ड़दया, ये तीनों घटनाए  ँ
                                          एक  कालखर  में  नहीं,  परंतु  एक  ही
                                                    ं
                                            े
                                          उद्शय के ड़लए लड़ी गई थीं- सवराजय।
                                              इन घटनाओं ने यह ड़सद्ध ड़कया ड़क
                                          भारत की आज़ादी कोई दया नहीं थी,

                                          बकलक यह बड़लदान, साहस और नयाय
                                          के प्ड़त अड़रग ड़वशवास का पररणाम थी।
                                              चमपारण  सतयाग्रह  (1917)  :
                                          सवतंत्रता की पहली ड़चंगारी
                                                ै
                                              अप्ल  1917  की  तपती  गममी  में,
                                                              ं
                                          ड़बहार  के  चमपारण  में  शाड़त  से  शुरू
                                          हुआ आंदोलन एक क्ांड़त में बदल गया।



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