Page 59 - Mann Ki Baat - Hindi
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इसका संदेश गूँज उठा :             ड़सद्ध ड़कया ड़क प्तीकों के माधयम स  े
              ‘कोई  भी  कानून  उस  जनता  की   साम्राजय को चुनौती दी जा सकती है।
          गररमा  को  नहीं  बाँध  सकता  जो  जाग   ये  घटनाएँ  मात्र  इड़तहास  की

          चुकी है।’                         धरोहर नहीं हैं, ये आज के युग के ड़लए
              इस नमक सतयाग्रह ने राष्ट्रवयापी   भी  जीवंत  संदेश  हैं।  अनयाय  आज  भी
          ड़सड़वल नािरमानी आंदोलन को जनम      जब भ्रष्टाचार, ड़वषमता और उदासीनता
          ड़दया।  लाखों  लोगों  ने  नमक  बनाया,   के रूप में सामने आता है, तब चमपारण
          ड़ब्रड़टश वसतुओं का बड़हष्कार ड़कया, और   के  ड़कसान,  जड़लयाँवाला  के  बड़लदानी
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          जेलों  को  भर  ड़दया।  यह  केवल  नमक   और  दारी  के  सतयाग्रही  हमें  रासता
          का मामला नहीं था- यह आतम-सममान    ड़दखाते हैं।

                                                                     ं
          और आतमड़नभ्दरता का उदघोष था।          हमें  केवल  अतीत  को  श्रद्धाजड़ल
              जयोड़त अभी बुझी नहीं ह ै       नहीं देनी ह- हमें उस ड़चंगारी को ड़िर
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              अप्ल  महीने  में  इन  ऐड़तहाड़सक   से जलाना है।
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          घटनाओं का संयोग कोई संयोग मात्र      सवतंत्रता कोई उपहार नहीं थी- यह
          नहीं- यह एक संगड़ठत सवतंत्रता संघष्द   एक उत्रदाड़यतव है, ड़जसे बड़लदान और
          की कड़ी है। चमपारण ने हमें ड़सखाया ड़क   संघष्द से प्ापत ड़कया गया।
          सामड़हकता  में  शक्त  है,  जड़लयाँवाला   तो आइए, उनके पदड़चह्ों पर चलें-
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          बाग  ने  बताया  ड़क  क्कूरता  के  ड़वरुद्ध   सतय के साथ, नयाय की ओर और
          एकता जनम लेती है, और दारी माच्द न  े  अटूट संकलप के साथ।
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