Page 53 - Mann Ki Baat - Hindi
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ये कहाड़नयाँ ड़सि्फ खेती की नहीं, हर ड़कसान एक नवप्वत्दक। अब खेती
बकलक आतमड़वशवास, नवाचार और मात्र अन् उपजाने का माधयम नहीं
संकलप की भी हैं। प्धानमत्री श्री नरनद्र बकलक नवाचार, आतमड़नभ्दरता और
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मोदी ने अपने ‘मन की बात’ समबोधन सामाड़जक बदलाव की ड़मसाल बन
में इन ड़कसानों का ड़वशेष रूप स े गई है। देश के ड़वड़भन् कोनों से ऐसी
े
उललख ड़कया। इससे यह सपष्ट होता ह ै
कहाड़नयाँ सामने आ रही हैं, जहाँ कड़ठन
ड़क देश की उन्ड़त का रासता खेतों स े
पररकसथड़तयों के बावजूद ड़कसानों न े
होकर ही गुज़रता है। आज के ड़कसान
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अपने संकलप, वैज्ााड़नक दकष्टकोण और
केवल अनाज उतपादक नहीं, बकलक
उ द्यमशीलता से असमभव को समभव
नवाचार के योद्धा बन चुके हैं।
कर ड़दखाया है। भारत की ड़मट्टी स े
भारत की कृड़ष अब केवल मौसम,
अब ड़सि्फ िसलें नहीं, बकलक उममीद,
भौगोड़लक सीमाओं या परमपरागत
े
तरीकों तक सीड़मत नहीं रही, आज यह आतमड़वशवास और प्रणा की कहाड़नया ँ
एक नई उड़ान भर रही है। अब यहाँ हर भी जनम ले रही हैं जो पूरे देश को आग े
खेत एक प्योगशाला बन चुका है और बढ़ने की राह ड़दखा रही हैं।
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