Page 54 - Mann Ki Baat - Hindi
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         भञारतीय कति की                   भारत के अिर-अिर कोनों में वकसान आज
                                          वसफ्क फसि नहीं उरा रहे हैं, बषलक नई सोच
                                                     कृ
           बदलती तस्ीर                    और प्र्योर से कवष के क्षेत् में क्रांवत िा रहे हैं।
                                          चाहे वह कना्गटिक के मैदानी इिाकों में सेब
              की कहञािी                   की वमठास हो ्या तवमिनाडु और राजसथान
                                          में िीची की सफिता, हर कहानी एक नए
                                          भारत की तसवीर पेश करती है। प्रधानमंत्ी
          जकिणानों की जुबणानी             नरनद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ का्य्गक्रम
                                            े
                                          में इन मेहनती वकसानों का वज़क्र कर उनके
                                                                    ु
                                          ्योरदान को रा्ट्ी्य पहचान दी है। प्रसतत ह  ै
                                                                   ु
                                          उनहीं वकसानों की कहानी उनहीं की ज़बानी।
                                         वकसान अरर ठान िे तो उसके विए कोई भी
                                         का्य्ग असमभव नहीं है। हमारे मेवाड क्षेत् में
                                         तापमान अवधक रहता है। इसविए मैंने िीची
                                         के समबंध में इनटिरनेटि के माध्यम से अध्य्यन
                                         वक्या और कुछ सीवन्यर सावथ्यों से मदद
                                         िी। इसका पररणाम ्यह हुआ वक हम िीची
                                         के  विए  आवश्यक  तापमान  को  बरक़रार
                                         रखने में सफि हो रए। प्रधानमंत्ीजी ने हम
                                         जैसे छोटि़े वकसानों का वज़क्र वक्या और देश
                                         भर को बता्या वक कैसे वकसान छोटि़े-छोटि़े
                                         प्र्योर करके खेती की दुवन्या में कुछ न्या
                                         करने की कोवशश कर रहे हैं। मैं प्रधानमंत्ीजी
                                         का शुवक्र्या अदा करना चाहता हँ। तू

                                              े
                                          जि्नद्र जिंह रणा्णा््, कृषक, रणािसथणान


















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