Page 50 - Mann Ki Baat - Hindi
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                 भञारत क तवसभन्न क्त्ों िें कति की िई
                                                        ृ
                                                        उपलब्धियञा     ँ







                                              भारत  एक  कृड़ष  प्धान  देश  है,
           ...वायनार  में  ये  केसर  ड़कसी  खेत
                                            े
           या  ड़मट्टी  में  नहीं  बकलक  Aeroponics   लड़कन अब यह देश ड़सि्फ परमपरागत
        Technique से उगाए जा रहे हैं। कु् ऐसा   खेती तक सीड़मत नहीं रहा। वैज्ााड़नक
        ही हैरत भरा काम लीची की पैदावार के
        साथ हुआ है। हम तो सुनते आ रहे थे ड़क   सोच, नवाचार और दृढ़ संकलप ने खेती
                                    ं
        लीची ड़बहार, पकशचम बंगाल या झारखर   के  क्ेत्र  में  कई  ऐसे  चमतकार  कर
        में  उगती  है।  लड़कन  अब  लीची  का
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        उतपादन  दड़क्ण  भारत  और  राजसथान   ड़दखाए हैं, जो कभी असंभव माने जाते
        में भी हो रहा है।... अगर हम कु् नया   थे। आज देश के अलग-अलग ड़हससों स  े
        करने का इरादा कर लें, और मकशकलों   ऐसी कहाड़नयाँ सामने आ रही हैं, जो न
                                ु
        के बावजूद रटे रहें, तो असमभव को भी
        समभव ड़कया जा सकता है।             केवल प्ेरक हैं, बकलक पूरे कृड़ष तंत्र के

                   - प्धानमंत्री नरेनद्र मोदी   ड़लए उममीद की ड़करण भी हैं।
               (‘मन की बात’ समबोधन में )
                                              मैदानी इलाकों में सेब की ड़मठास

                                              आमतौर पर सेब की खेती पहाड़ी
                                          इलाकों में ही मुमड़कन मानी जाती थी,

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                                          लड़कन  कना्दटक  के  बागलकोट  ड़ज़ल  े
                                          के  श्री  शैल  तेली  ने  इस  धारणा  को

                                          तोड़ ड़दया। उनहोंने अपने गाँव कुलाली
                                          में 35 ड़रग्री से अड़धक तापमान में सेब

                                          उगाने  में  सिलता  पाई  है।  यह  काय्द
                                          केवल एक प्योग भर नहीं था, बकलक

                                          वषयों की मेहनत और लगन का पररणाम
                                                                      े
                                          था। आज उनके बगीचे में सेब के पड़



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