Page 42 - Man Ki Baat Nov 2024 (Hindi)
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पुस्तकालय
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ज्ान और रचनात्मकिा क प्रवेश द्ार
समय के बाद औि खासकि छुहटियों के
दौिान, इनिें समभालना मबशकल िोता ि ै
ु
तथा माता-हपता अ्सि इनिें समझाते-
समझाते थक जाते िैं।
मैंने सिजता से पूछा, “्या आपके
गाँव में कोई पुसतकालय िै, हजसमें
हवहभन्न प्रकाि की पुसतकें िों औि विा ँ
बैठकि पढ़ने का अचछा मािौल िो?”
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सुधिा मूहत्य वे मिे इस प्रश्न से आशचय्यचहकत
िाजयसभा सांसद, िो गए औि उनिोंने किा, “िमािे सभी
लेहखका औि समाजसेवी सकूलों में एक पुसतकालय िै औि
प्रतयक कक्ा को एक सपताि, पढ़ने का
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समय हमलता िै, तो िमें हकसी अनय
पुसतकालय की आवशयकता ्यों िै?”
“उन युवा वयसकों का ्या, जो
कुछ साल पिले मुझे एक काय्यरिम सकूल निीं जाते?”
के हलए हकसी गाँव में आमहत्त हकया उनिोंने एक क्ण सोचा औि किा,
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गया था। साल की शुरुआत में गाँव के “वे पढ़ते निीं िैं।”
दौिे के बीच मैंने बिुत से छोट़े बच्ों को मैं मुसकुिाई औि उनसे बातचीत
परिसि की छतों की दीवािों पि बैठ़े, जािी िखते िुए किा हक अनुकूल
ू
सडकों पि घूमते, समिों में बैठते औि वाताविण के साथ एक पुसतकालय का
कुछ खेल खेलते िुए देखा। मुझे लगा हनमा्यण किना इसका समाधिान िोगा।
हक वे अपना कीमती समय बबा्यद कि यि बच्ों औि युवा वयसकों दोनों को
ििे िैं। ग्राम प्रधिान ने भी िमािा भहवष्य आकहष्यत किेगा।
यानी बच्ों को लेकि अपनी हचंता वय्त “िमें एक औि पुसतकालय का
की। उनिोंने किा हक िमने इन बच्ों हनमा्यण किके पैसा ्यों बबा्यद किना
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को समझाने की कोहशश की िै, लहकन चाहिए?” वे यि जानने के हलए उतसक
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वे निीं सुनते औि अगि इनि ़जयादा थे।
समझाते िैं तो ये भाग जाते िैं। सकूल के पुसतकालय मिज़ चाि दीवािों औि
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