Page 35 - Mann Ki Baat Hindi
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              “आज हम एक अद भति इकोडसस्म     समटाज जटागतिटा है, तिो सूखतिी नडदयटाँ भी
          देख सकतिे हैं जहटाँ प्ककृडति लोगों से डमलतिी   िहने लगतिी हैं। िॉ. पवन कुमटार कटा यह
          है... यहटाँ के जटानवर और वनयजीव, जो   संदेश पूरे भटारति के डलए एक सिक है:
          पहले ग़टायि हो गए ्थे, अि वटापस आ    “भटारति  भर  के  समुदटायों  के  डलए
          रहे  हैं...  भूजल  सतिर  िढ़ने  के  कटारण   मेरटा संदेश यही है डक नदी कटा पुनरुद्टार
          आज डकसटानों को अचछी पैदटावटार डमल   योजनटा  से  पहले  भटावनटा  से  शुरू  होतिटा
          रही है।”                          है। जि नदी को केवल जलस्ोति नहीं,
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              यह प्ोज्् डसफ़्फ पटानी िचटाने के   िकलक  अपनी  संसककृडति,  आस्थटा  और
          िटारे में नहीं ्थटा, िकलक यह लोगों के हक   भडव्य के रूप में देखटा जटातिटा है, तिि जन
          और सवटाडभमटान की लड़टाई ्थी। जैसटा डक
                                                           ृ
          भरति कहतिे हैं:                   भटागीदटारी सवतिः जटागति होतिी है... समटाज,
              “यह ऊपर से ्थोपटा गयटा प्ोज््   नटागररक और प्शटासन जि एक लक्य के
                                     े
          नहीं है, यह लोगों कटा आंदोलन है। यह   डलए सटा्थ चलतिे हैं, तिि हर नदी डफर स  े
          जमीनी-सतिर पर समुदटाय द्टारटा चलटायटा   जीडवति हो सकतिी है।”
                                                                 ं
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          गयटा  प्ोज््  है।  इसडलए,  यहटाँ  लोग   तिमसटा  से  लेकर  अनतिपुर  तिक
          जलटाशयों के रक्षक और जल संरक्षण के   की  यह  यटात्रटा  हमें  ितिटातिी  है  डक  अगर
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          एिेसिर िन गए हैं।”                हम  अपनी  डवरटासति  और  पयटा्षवरण  को
              चटाहे  आजमगढ़  की  तिमसटा  हो  यटा   िचटाने कटा डजममटा ख़ुद उठटा लें, तिो आन  े
          अनतिपुर के जलटाशय, दोनों जगह एक   वटाली पीडढ़यों को हम एक हरटा-भरटा और
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          िटाति  समटान  है-  इचछटा  शक्ति।  जि   ख़ुशहटाल कल दे सकतिे हैं।




























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