Page 52 - Mann Ki Baat (Hindi)
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वक्या  जा  रोहा  है  वजसके  तहत  भारोत   भारोत के विवभन्न भाषा-भाषी समुदा्यों
                  ू
        के विविधतापणमा समाज के बीच आपसी   के  बीच  आपसी  समझ  तथा  वजज्ासा
        समझ  बढ़ाने  के  प््यास  चल  रोहे  हैं।   बढ़ने  से  रोाष्ट्ी्य  एकता  को  भी  बल
        दोनों ही पहलों में पाठ्य पुस्तकों से आि  े  वमलता है। जब िारोाणसी में कोई बच्ा

        जाकरो भाषा के साथ भािना्वमक औरो   तवमल  सीखता  है  तो  क्ेत्री्य  अिरोोध
                       ं
        आ्योजना्वमक सम्बध बनाने की वदशा   समाप्त होकरो अपने ही देश के वकसी
        में  वशक्ा  दी  जाती  है।  इन  प््यासों  स  े  अन््य  भाि  की  संस्ककृवत  को  जानने-

        तवमल केिल वशक्ा का विष्य न रोहकरो   समझने का भाि जािृत होता है। जैसा
                                                   ं
        साझी विरोासत के साथ जीने का अनुभि   वक प्धानमत्री ने भी कहा था वक 'भाषा
        करोाने का माध््यम बन िई है।       की शत्क्त में ्यह नई रुवच ही तो भारोत
            इसके  नतीजे  बहुत  शानदारो  रोह  े  की  िास्तविक  एकता  है।'  औरो  इसस  े

                                 ै
        हैं।  एक  तो  इनसे  भारोत  की  ित्श्चक   बढ़करो  ्यह  वक  ्यिाओं  को  विश्ि  की
                                                        ु
        पहचान  को  बल  वमलता  है  क््योंवक   सबसे प्ाचीन एिं सावहत््व्यक भाषाओं में
        प्िासी  भारोती्यों  को  अपने  पिमाजों  की   शावमल  तवमल  भाषा  जानने  का  िौरोि
                               ू
        सही जानकारोी प्ाप्त होती है तथा दूसरोे,   प्ाप्त हो रोहा है।







           “काशी तवमल संिमम के तहत जो हम लोिों

           ने तवमल सीखी, िह बहुत अच्छा लिा। इस

           अिसरो के वलए हम प्धानमंत्री का धन््यिाद
           करोना चाहते हैं।”

             -पवन बसंह, कक्ा 9, उदय प्रताप इंर्र कॉलेज,

                                          वाराणसी












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