Page 47 - Mann Ki Baat (Hindi)
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िहानपोरोा स्थल परो खुदाई के दौरोान वनकली कुषाण कालीन डा्यपरो-पैबल दीिारो (वग्ड लेआउट म)
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वनमामाण तकनीकों तथा प्ाप्त पुरोािशेषों में वमली िांधारो कला से बहुत वमलती-
की, कश्मीरो के हरोिान औरो उश्कुरो जैसे जुलती है। खुदाई से वसद् हुआ है वक
अन््य बौद् स्थलों से काफ़ी समानता है। प्ाचीन कश्मीरो भारोत, मध््य एवश्या औरो
विरो भी, रोवड्यो-काबमान विश्लेषण से ्यह रोेशम मािमा के बीच सेतु का का्यमा करोता
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कालक्रम औरो अवधक सटीक रूप से रोहा था। ्यह खोज, स्थानी्य पहचान को
वनधामाररोत वक्या जा सकेिा। अलिाि की अिधारोणा से वनकाल करो,
इस खुदाई से इस स्थल का विश्ि बंधु्वि औरो दशमान के ऐसे क्त्र की
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पुरोातावत्तिक महत्ति स्पष्ट रूप से ओरो ले जाती है जहाँ विचारोों, कला औरो
रोेखांवकत होता है, विशेषकरो कश्मीरो की दशमान का मुक्त प्िाह था।
बौद् सांस्कवतक भौिोवलक संरोचना के ड्ोन सिदेक्ण औरो पुरोालेख
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संदभमा में िारामूला-झेलम कॉररडोर के अनुसंधान (19िीं शता्धदी की फ्रांसीसी
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साथ िेहानपोरोा को एक अ्व्यत महत्तिपूणमा तस्िीरोें) जैसे आधुवनक तकनीकी साधनों
स्थान वमलता है। ्यह स्थल कश्मीरो का से हुई िैज्ावनक पुत्ष्ट ने स्थानी्य समुदा्य
बौद् इवतहास उजािरो करोते हुए पुत्ष्ट को ििमा से भरो वद्या है। िेहानपोरोा,
करोिा वक कश्मीरो बौद् अध््य्यन का कश्मीरो की ्यादों को मध््यकालीन औरो
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जीता-जािता समृद् केंद्र था। िेहानपोरोा प्ारोत्म्भक आधुवनक काल से भी आिे ले
के िो टीले, जो कभी साधारोण टीले जाकरो, लिभि दो सहस्ात््धद्यों पूिमा तक
मानकरो उपेवक्त रोहे थे, िही अब इस का विस्तारो देते हुए, विशेष रूप से धावममाक
इलाके के पररोदृश््य को एक पािन एिं मेलजोल का िह कालखंड उजािरो करोता
ऐवतहावसक स्थल में बदल चुके हैं। है वजसमें बौद् मत औरो बाद में वहंदू धममा
िेहानपोरोा की स्थाप्व्य शैली का सह-अत्स्त्वि रोहा तथा परोस्परो दोनों
आज के अफ़िावनस्तान औरो पावकस्तान ने एक-दूसरोे को प्भावित वक्या।
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