Page 58 - MANN KI BAAT (Hindi)
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से अखधक का नेतृति मखहलाओं के हाथों   तरीके से लागू करने की खहममत रिते
        में है। यह केिल प्रगखत नहीं है, यह एक   हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के जीिन को
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        रिांखत  है।  हम  िि  रहे  हैं  खक  मखहलाएँ   प्रभाखित करता है।
        न  केिल  इसमें  भागीिारी  कर  रही  हैं,   इससे  भी  अखधक  खिलचसप  है
        बकलक अपखशषट प्रबंधन, जैि प्रौद्योखगकी   मानखसकता  में  बिलाि।  ड्लयूटीफंड
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        और  लॉखजकसटक  जैसे  क्षेत्रों  में  नेतृति   के 60 प्रखतशत से अखधक आििक अपने
        कर रही हैं। यह सभी ऐसे क्षेत्र हैं खजनहें   सटाट्टअप  पर  पूण्षकाखलक  तौर  पर
        कभी पुरुष-प्रधान माना जाता था। अब   काम कर रहे हैं। कई लोगों ने कॉलेज
        उनहें खकसी की अनुमखत की प्रतीक्षा नहीं   में रहते हुए ही शुरुआत की, फैकलटी
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        है, िे िि ही अपना एजेंडा तय कर रहे हैं।  मेंटर  से  लेकर  कॉलेज  इनकयूबेटर
            ज्ाान  का  अब  लोकतंत्रीकरण  हो   तक  सबका  लाभ  उठाया।  कुछ  लोगों
        गया है। यखि आप अपनी कमपनी बनाना   ने तो अनयत्र रोज़गार पाने की इचछा भी
        चाहते हैं तो उसका काम सीिने के खलए   छोड़ िी, कयोंखक उनहें खनयखमत तनखिाह
        आपको  खसखलकॉन  िैली  में  रहने  की   की  सुरक्षा  से  कहीं  अखधक  अपने  िि
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        ज़रूरत नहीं है। इंटरनेट ने सीिने की   के खिचारों पर भरोसा था। इसके खलए
        प्रखरिया  को  आसान  बना  खिया  है  और   खहममत की ज़रूरत होती है।
        पहले की तुलना में युिा भारतीय इसका    सटाट्टअप बराबरी लाने िाले बन गए
        कहीं अखधक लाभ उठा रहे हैं। उद्यमी नए   हैं। उनहें इस बात की परिाह नहीं है खक
        हीरो हैं, इसखलए नहीं खक िे सूट पहनते हैं   आपने कॉलेज कहाँ से खकया या आपने
        या लािों अखज्षत करते हैं, बकलक इसखलए   कॉलेज खकया भी या नहीं। जीत योगयता
        खक िे अपने मंसूबे पालने और उनहें ऐसे   की होती है, साि की नहीं। युिा भारत




























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