Page 25 - Mann Ki Baat Hindi
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मुझे सोचने पर मजबूर कर दि्ा दक
आने ्ाली पीदढ़्ों का क्ा होगा? मैं अब
भी ्ह भार्ा बोल सकता हूँ। इस भार्ा
के कई श्िों के द्लुपत होने की दचंता
ने मुझे इस बारे में कुछ करने के दलए
े
प्ररत दक्ा।
मैंने प्ौद्ोदगकी का इसतेमाल
करते हुए एआई-संचादलत संगीत के
साथ कोलामी में एक गीत बना्ा। इस
पर िशमाकों की प्दतदरि्ा बहुत बदढ़्ा
थी, खासकर जनजाती् समुिा्ों की।
इससे उतसादहत होकर मैं कोलामी तथा
गोंडी भार्ा में और अदधक दडदजटल
संसाधन द्कदसत करना चाहता हूँ, उनहें
े
अंग्जी तथा तेलुगु के साथ संरदक्त
करना चाहता हूँ। अगर सही समथमान
दमले, तो मैं अपनी भार्ाई द्रासत की
रक्ा के दलए इस पहल का और द्सतार
कर सकता हूँ।”
-थोडासम कैलाश-
आदिलाबाि, तेलंगाना
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