Page 23 - Mann Ki Baat Hindi
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बदन्ािी ढाँचे के द्कास और ऊजामा प्ोतसादहत करती है। उभरते ्ैज्ाादनकों
सुरक्ा तथा जल्ा्ु परर्तमान जैस े में परर्तमानशीलता द्कदसत करना
िबा् ्ाले मुद्ों से दनपटने में सहा्क और द्फलता को एक अंतदनमादहत
रहा है। भारत में द्ज्ाान दशक्ा एक सफलता कारक के रूप में सामान्
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व्ापक िलष्टकोण है दजसमें व्ा्हाररक बनाना आतमद्श्ास और संक्प के
गदतद्दध्ाँ, सह्ोगातमक प््ास और साथ चुनौदत्ों का सामना करने के
तकनीकी उपकरण शादमल हैं। ्ह
दलए सशकत बना सकता है।
समा्ेशी का्मारिम द््ेचनातमक सोच,
सी.्ी. रमन की ्ैज्ाादनक खोज
समस्ा-समाधान और न्ाचार पर
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के कीदतमामान का दि्स मनाकर ््ा
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केंदद्रत है। ्ह द्द्ादथमा्ों को तज़ी स े
न्ोदित ्ैज्ाादनक अटूट दजज्ाासा,
बिलते तकनीकी पररिृश् और भारत
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दनरंतर समपमाण, उतसक अ्लोकन
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के भद्ष्् के द्कास के दलए त्ार
कौशल और स्ाल पूछने के महत्् को
करता है। ्ैज्ाादनक अन्ेर्ण और
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न्ाचार में उज््ल भद्ष्् के दलए सीख सकते हैं। संक्प में, दजज्ाासा पिा
््ा पीढ़ी में दजज्ाासा और जुड़ा् को करके, परामशमा तथा शोध के अ्सर
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बढ़ा्ा िेना आ्श्क है। अनुसंधान- प्िान कर, सह्ोग को बढ़ा्ा िेकर
आधाररत दशक्ा द््ेचनातमक सोच को और समा्ेशी ्ाता्रण बनाकर हम
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बढ़ा्ा िेती है। ्ह बच्ों में खोज तथा ््ाओं को भद्ष्् के ्ैज्ाादनक बनन े
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नए िलष्टकोणों को आगे बढ़ाने के दलए के दलए प्ेररत और त्ार कर सकते हैं।
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