Page 29 - Mann Ki Baat Hindi
P. 29

े
          को ऊपर उठाने ्ाले सामादजक सुधारों    द्द्ा: समसता: त् िद् भेिा:
          की दहमा्त की।                        सत्री्: समसता: सकला जगतसु।
              हंसा  जी्राज  मेहता  भारत  के    इसका  अथमा  है  दक  ज्ाान  के  सभी
          इदतहास  में  ऐसी  मदहला  रही  हैं  दजनह  ें  रूप  ि्ी  की  अदभव्लकत्ाँ  हैं,  और
                                                 े
          मदहला अदधकारों, सामादजक सुधार और   िदन्ा  की  सभी  मदहलाओं  की  शलकत
                                             ु
          दशक्ा  के  दलए  उनकी  अग्णी  भदमका   उनकी दिव् ऊजामा का प्दतदबमब हैं। हंसा
                                   ू
          के  दलए  जाना  जाता  है।  एक  स्तंत्रता   मेहता के ्ोगिान ने इस लोकाचार को
                             े
          सेनानी, सुधार्ािी और लदखका के रूप   ध्ान में रखते हुए, राष्ट् के दनमामाण में
          में उनहोंने स्तंत्र भारत में मदहलाओं की   भारती्  मदहलाओं  की  शलकत  और
           ू
          भदमका को साकार करने में महत््पणमा   परर्तमानशीलता  का  उिाहरण  प्सतत
                                      ू
                                                                        ु
          भदमका दनभाई। जैसा दक अंतरराष्ट्ी्   दक्ा।
           ू
          मदहला  दि्स  सत्री-पुरुर्  समानता    भारती्  समाज  पर,  द्शर्कर
                                                                     े
          और  ्लश्क  सतर  पर  मदहलाओं  की   नीदत-दनमामाण  और  संसथागत  सुधार
               ै
          उपलल्ध्ों को उ्लेदखत करता है, ्ह   के क्त्र में हंसा मेहता का प्भा् गहरा
                                                े
          उनहीं  की  द्रासत  है  और  इसके  दलए   था।  ऐसे  सम्  में  जब  मदहलाओं  स  े
          उनका  सममान  करना  उदचत  है।  ्ह   पारमपररक  भदमकाओं  तक  ही  सीदमत
                                                      ू
          आज की पीदढ़्ों को भी प्ररत करती हैं।   रहने  की  अपेक्ा  की  जाती  थी,  उनहोंन  े
                             े
          भारती् परमपरा में, मदहलाओं को लमब  े  सामादजक मानिंडों को चुनौती िी और
          सम् से िृढ़ता, ज्ाान और शलकत के    सत्री-पुरुर्  समानता  की  प्बल  समथमाक
          अ्तार के रूप में सममादनत            के  रूप  में  उभरीं।  अदखल  भारती्
          दक्ा  जाता  रहा  है।  ि्ी             मदहला  सममलन  की  सिस्  के
                            े
                                                          े
          महातम् में कहा ग्ा हैः                 रूप  में  हंसाजी  ने  मदहलाओं  की

























                                        25
                                        25
                                        25
   24   25   26   27   28   29   30   31   32   33   34