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घास के मैदानों का बखतरबंद योद्ा –
          भारतीय गैंडा


           भारतरीय गैंडा प्राचरीन काल के जरीिों करी एक जरीवित वमसाल
           है। इसकरी मोटरी, तहिार तिचा और एकल सींग इसे विशेष
           बनाते हैं। यह काजरीरंगा और असम के जलभराि िाले मैिानों
           में राज करता है।



                             कानहा के दलदल का राजकुमार – बारहशसंगा

                                  बारहवसंगा भारत के िलिलरी क्त्ों और घास के मैिानों का एक
                                                    े
                                 ख़ूबसूरत बावशिा है। इसके शानिार सींग, जो 12 तक करी संखया में हो
                                         ं
                                 सकते हैं, इसे विवशष्ट पहचान िेते हैं। यह कभरी मधय और उत्तररी भारत
                                 के जंगलों में बडरी संखया में पाया जाता था, लेवकन अब यह कानहा
                                  राष्ट्रीय उद्यान (कानहा नेशनल पाक्फ) में संरवक्त है।






            अंडमान के शहरणों की हमराज़







                                     “मेरा नाम है अनुराधा राि है। मैं इस आइलैंड करी चौथरी
                                   जनरेशन हूँ। मैं जब यहाँ आई थरी तो बहुत ्ोटरी थरी। एक
                                   वफशरमैन करी बोट में यहाँ आई थरी और यहाँ आकर वहरण
                                   िेखे। मैं शुरू से यहाँ से जुडरी रहरी हूँ। यहाँ आकर वहरणों
                                   को खाना िेतरी थरी। घरिालों ने भरी टोकना शुरू कर विया,
                                  मगर मैं सुनतरी नहीं थरी। जब भरी आँख बंि करतरी तो ये वहरण
                                विखते थे। ये ्ोटे जानिर हैं, पेड के ऊपर चढ़कर नहीं खा
                               सकते और वफर भूखे रहते हैं। अगर आप खाना नहीं िोगे तो ये
                               नहीं खाएँगे, जो नरीचे वगरा है, िहरी खाएँगे। उन पर धयान विया
                              जाए, समय पर खाना विया जाए, तो िे सिसथ रहते हैं। एक समय
                              आया जब लोग इनहें मारकर ले जा रहे थे और इनकरी संखया घटने
                              लगरी, तब मैंने वडफेनस से इनको बचाने के वलए आग्ह वकया। पहले
                             हरी वहरणों करी संखया घटकर बहुत कम हो गई थरी, 17 वहरणों से
                             शुरुआत करी थरी, आज मेरे पास रोस आइलैंड में 550 वहरण हैं।”
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