Page 58 - Mann Ki Baat - Hindi
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सक्ि्यों के उतपादन से कालाहांिी में बदलाव
ओवडशा के कालाहांडी में वकसान उ्पादक संगठन (एफपीओ) खे्ती में महत्िपूणघा बदलाि लाने में जुटछे
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हैं। कृषण चंद् नाग और धनंजय नायक जैसे दूरदशजी वकसानों के ने्त्ि में ये एफपीओ आधुवनक खे्ती
के संसाधन, ्तकनीकी सहाय्ता और बा़िार ्तक सीधी पहुँच प्रदान कर्त हैं। उनके प्रयासों से ्ोटछे
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और सीमां्त वकसान लाभालनि्त हो रहे हैं। शुरुआ्त में कु् एक वकसान इस संगठन से जु़िछे, वक्तु,
यह संगठन अब 200 से अवधक वकसानों का एक ब़िा नेटिक बन गया है, वजसमें 45 मवहला वकसान
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शावमल हैं। ये वकसान टमाटर, वमचघा और करेला जैसी अवधक मू्य िाली सलबजयाँ उगा रहे हैं।
इस पहल से वबचौवलयों की भूवमका समाप्त हो गई है, साथ ही वकसानों को उवच्त मू्य वमलने
लगा है और उनका मुनाफ़ा बढ़ गया है। नाबाडटू (राषट्ीय कृवष और ग्ामीण विकास बैंक)
और भार्त सरकार के समथघान से ये एफपीओ न केिल आजीविका में सुधार कर रहे हैं, इन
प्रयासों से इस इलाके से लोगों का पलायन रुका है और वशषिा को भी बढ़ािा वमला है। अनय
लोग भी ऐसा करने के वलए प्रेरणा ले कर रहे हैं।
“मैंने 2006 में वमचघा की खे्ती शुरू की और पहले िषघा में 2.6 लाख रुपये अवजघा्त वकए। इन िषषों में, मेरे
प्रयास बढ़्त गए और 2022 ्तक मेरा कारोबार बढ़कर 1 करो़ि 42 लाख रुपये हो गया और मैंने 85
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लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।
हालाँवक मुझे एहसास हुआ वक अकेले मेरी सफल्ता पयाघाप्त नहीं थी। मेरा सपना हमारे बलॉक और वजले
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के अनय वकसानों का उ्थान करना था, उनह आवथघाक रूप से आ्मवनभघार और समृद्ध बनाना था। इस
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दृलषट से, मैंने वकसानों को एक साथ लाने का फैसला वकया और उनह टमाटर, वमचघा और करेला जैसी
लाभदायक फसलें उगाने में मदद की।
इस लक्य ्तक पहुँचने के वलए मैंने एक सरकारी पररयोजना के ्तह्त नाबाडटू के सहयोग से एक एफपीओ
बनाया। मुझे एफपीओ का एमडी वनयुक्त वकया गया, वजसमें अब 10 बोडटू सदसय हैं। इस एफपीओ के
माधयम से हम वकसानों को बीज, कीटनाशक, उिघारक और पौधे उपलबध करा्त े
हैं, साथ ही आधुवनक कृवष ्तकनीक, वसंचाई, ग्ेवडिंग और पैकेवजंग में उवच्त
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प्रवशषिण भी दे्त हैं। एफपीओ उनकी उपज के वलए समुवच्त बा़िार पहुँच
भी सुवनलशच्त कर्ता है। इससे वबचौवलयों की भूवमका समाप्त हो गई है,
जो पहले कम कीम्तों की पेशकश करके वकसानों का शोषण कर्त थे।
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इस पहल ने वकसानों को पहले की ्तुलना में 2-3 गुना अवधक कमाने
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में मदद की है। इससे उनह खे्ती जारी रखने और अपनी आजीविका में
सुधार करने के वलए प्रेरणा वमली है।”
कृषण चंद् नाग
सांचे गाँि, कालाहांडी, ओवडशा
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