Page 17 - Mann Ki Baat - Hindi
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को लीची उगाने में सिलता ड़मली है।   थी। अंग्रेजों के अतयाचार उफ़ान पर थे।
                            े
          ये सभी उदाहरण बहुत प्ररत करने वाले   गरीबों, वंड़चतों और ड़कसानों का शोषण
          हैं। अगर हम कु् नया करने का इरादा   अमानवीय सतर को भी पार कर चुका

          कर लें, और मुकशकलों के बावजूद रटे   था।  ड़बहार  की  उपजाऊ  धरती  पर  ये
          रहें, तो असमभव को भी समभव ड़कया जा   अंग्रेज  ड़कसानों  को  नील  की  खेती  के

          सकता है।                          ड़लए मजबूर कर रहे थे। नील की खेती से
                                            ड़कसानों के खेत बंजर हो रहे थे, लेड़कन

                                                    कू
              मेरे पयारे देशवाड़सयो, आज अप्ल   अंग्रेजी हुकमत को इससे कोई मतलब
                                      ै
          का  आड़खरी  रड़ववार  है।  कु्  ही  ड़दनों   नहीं था। ऐसे हालात में, 1917 में गाँधीजी
          में  मई  का  महीना  शुरू  हो  रहा  है।  मैं   ड़बहार के चमपारण पहुँचे हैं। ड़कसानों ने

          आपको आज से करीब 108 साल पहले      गाँधीजी को बताया - हमारी ज़मीन मर
                                  ै
          लेकर चलता हूँ। साल 1917, अप्ल और   रही है, खाने के ड़लए अनाज नहीं ड़मल
          मई के यही दो महीने - देश में आज़ादी   रहा है। लाखों ड़कसानों की उस पीड़ा से

          की  एक  अनोखी  लड़ाई  लड़ी  जा  रही   गाँधीजी के मन में एक संकलप उठा। वहीं


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