Page 30 - Mann Ki Baat - Hindi
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वसुधैव कटुम्बकि ्
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ववश्व-ममत् क रूप में भाित
हमारी परमपरा है, हमारे संसकार भारत का प्ाचीन दश्दन ‘वसुधैव
हैं ‘वसुधैव कुटुमबकम्’ की भावना
- पूरी दड़नया एक पररवार है। संकट के कुटुमबकम्’, ड़जसका अथ्द है ‘सारा ड़वशव
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समय ड़वशव-ड़मत्र के रूप में भारत की एक पररवार है’, केवल एक आधयाकतमक
ततपरता और मानवता के ड़लए भारत की
प्ड़तबद्धता हमारी पहचान बन रही है। आदश्द नहीं है। यह एक जीवंत ड़सद्धांत है
- प्धानमंत्री नरेनद्र मोदी जो वैकशवक मंच पर भारत की काय्दनीड़त
(‘मन की बात’ समबोधन में )
को ड़दशा देता है, और भारत को एक
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सच् ड़वशव-ड़मत्र (दुड़नया का ड़मत्र) के
रूप में उभरने के ड़लए प्ररत करता है।
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चाहे महामारी हो, प्ाकृड़तक आपदा हो
“भारत की मानवता के प्ड़त प्ड़तबद्धता
केवल एक नीड़त नहीं है- यह एक वादा या मानवीय संकट, भारत हमेशा सबसे
है। एक ऐसा वादा जो हमारे प्ाचीन आगे रहा है- मदद केवल कत्दवय के रूप
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मूलयों में ड़नड़हत है, आधड़नक क्मताओं
में संवृत है, और हमारे लोगों की में नहीं, बकलक गहरी मानवीय संवेदना से
सामड़हक इच्ाशक्त द्ारा आगे बढ़ाया
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जा रहा है। चाहे वह बचाव के ड़लए बढ़ाया प्ररत होकर की गई है।
गया एक सहायक हाथ हो, ड़मत्रता में दी इस दश्दन की सबसे महत्वपूण्द
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गई एक व्सीन हो, या बाढ़ से पहल े
ड़कसी ड़कसान को सश्त करने वाला ड़मसाल COVID-19 महामारी के दौरान
एक ऐप हो, भारत एक भरोसेमंद और
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संवेदनशील वकशवक भागीदार के रूप भारत की भूड़मका रही। इस अभूतपूव्द
में अपनी भड़मका ड़नभाता रहा है। वैकशवक संकट में भारत ने एकजुटता
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-राजनद्र ड़संह,
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(पीटीएम, टीएम) सदसय एव ं और सहानुभूड़त के साथ अग्रणी
ड़वभाग प्मुख, राष्ट्रीय आपदा प्बंधन भूड़मका ड़नभाई। ‘वै्सीन मैत्री’ जैसी
प्ाड़धकरण
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