Page 28 - Mann Ki Baat - Hindi
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इसरो निशि
भारत की 50 वषषों की अंतररक्ष ्यात्ा केवि रॉकेटस और उपग्रहों की कहानी नहीं है, बषलक ्यह
इस क्षेत् से जुड़े िोरों की भी कहानी है। इस िेख में, हम उन समवप्गत व्यषकततव और उनके
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का्यषों का सममान करते हैं वजनहोंने भारत को बैिरावड्यों से चाँद के दवक्षणी ध्व तक पहुँचा्या।
हम शुरुआत करते हैं डॉ. ववक्रम साराभाई से, जो भारत के अंतररक्ष
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का्य्गक्रम के जनक माने जाते हैं। उनहीं की दरदवश्गता ने इसरो की नींव
रखी।
उनकी ववरासत को आरे बढा्या डॉ. उडुपी रामचंद्र राव ने, वजनहें
‘भारत के सैटि़ेिाइटि मैन’ के नाम से जाना जाता है। उनहोंने 1975 में
भारत के पहिे उपग्रह आ्य्गभट्ट के प्रक्षेपण की वनररानी की।
भारत के शुरुआती रॉकेटि वमशनों में अहम भतूवमका वनभाने वािों में स े
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एक थे डॉ. ए.पी.जे. अ्दुि किाम, वजनह ‘वमसाइि मैन ऑफ इवड्या’ के
रूप में जाना जाता है। भारत के 11वें रा्ट्पवत बनने से पहिे डॉ. किाम न े
इसरो के सटि़ेिाइटि िॉनच वहीकि (SLV) का्य्गक्रम में महत्वपतूण्ग ्योरदान
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वद्या। उनहोंने SLV-III का नेतृतव वक्या, वजसने 1980 में रोवहणी उपग्रह
को कक्षा में सथावपत वक्या। ्यह एक ऐवतहावसक क्षण था वजसने भारत को
अंतररक्ष महाशषकत्यों की सची में शावमि कर वद्या।
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आधुवनक ्यर में डॉ. के. राधाककृ्णन ने इसरो का नेतृतव उस सम्य
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वक्या जब भारत ने मंरि्यान (Mars Orbiter Mission) की सफिता
प्रापत की और भारत मंरि ग्रह तक पहुँचने वािा पहिा एवश्याई देश
बना।
डॉ. के. वसवन, चंद्र्यान-2 की असफिता
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के बावजद, उस दढता के प्रतीक बने वजसन े
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चंद्र्यान-3 की सफिता का मार्ग प्रशसत
वक्या।
एस. सोमनाथ, पतूव्ग इसरो प्रमुख
ने भारत के साहसी अवभ्यानों जैसे
आवदत्य-एि1, ररन्यान और शुक्र्यान
का नेतृतव वक्या।
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24 चंद्र्यान-3 का सफि प्रक्षपण
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