Page 8 - MKV (Hindi)
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        के इन प्रय़ासों ने मुझे लग़ात़ार ख् को   अचभय़ान से यह भी प्रकि हुआ। ऐसे ही
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        खप़ाने की प्ररण़ा ्ी है।          अनेकों प्रय़ासों क़ा पररण़ाम है चक आज
            स़ाचियो,  ‘मन  की  ब़ात’  में  चजन   हररय़ाण़ा में जेंडर रचशओ में सुध़ार आय़ा
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        लोगों  क़ा  हम  चजक्र  करते  हैं,  वे  सब   है। आइए आज सुनील जी से ही कु् गप
        हम़ारे हीरोज हैं, चजनहोंने इस क़ाय्वक्रम   म़ार लेते हैं।
        को जीवंत बऩाय़ा है। आज जब हम 100वें   प्रध़ानमत्री जी : नमसक़ार सुनील जी
                                                   ं
        एचपसोड के पड़़ाव पर पहिे हैं, तो मेरी य  े  सुनील  जी  :  नमसक़ार  सर,  मेरी
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        भी इच़्ा है चक हम एक ब़ार चिर इन   खुशी बहुत बढ़ गई है सर आपकी आव़ाज
        स़ारे हीरोज के प़ास ज़ाकर उनकी य़ात्ऱा   सुन कर।
        के ब़ारे में ज़ानें। आज हम कु् स़ाचियों   प्रध़ानमत्री जी : सुनील जी ‘सेलिी
                                                   ं
        से ब़ात भी करने की कोचशश करेंगे। मेर  े  चवि  डॉिर’  हर  चकसी  को  य़ा्  है...अब
        स़ाि जुड़ रहे हैं हररय़ाण़ा के भ़ाई सुनील   जब इसकी चिर िि़ा्व हो रही है तो आपको
        जगल़ान जी। सुनील जगल़ान जी क़ा मेर  े  कैस़ा लग रह़ा है?
        मन पर इतऩा प्रभ़ाव इसचलए पड़़ा, कयोंचक   सुनील जी : प्रध़ानमत्री जी, ये असल
                                                            ं
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        हररय़ाण़ा में जेंडर रचशओ पर क़ािी िि़ा्व   में  आपने  जो  हम़ारे  प्र्ेश  हररय़ाण़ा  स  े
                                    े
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        होती िी और मैंने भी ‘बिी बि़ाओ, बिी   प़ानीपत की िौिी लड़़ाई बचियों के िेहर  े
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        पढ़़ाओ’ क़ा अचभय़ान हररय़ाण़ा से ही शर   पर मुसकुऱाहि ल़ाने के चलए शर की िी,
                                    ु
                                                                ु
        चकय़ा ि़ा। और इसी बीि जब सुनील जी   चजसे आपके नेतृतव में पूरे ्ेश ने जीतन  े
        के ‘सेलिी चवि डॉिर’ कैमपन पर मेरी   की कोचशश की है तो व़ाकई ये मेरे चलए
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        नजर  पड़ी,  तो  मुझे  बहुत  अच़्ा  लग़ा।   और हर बिी के चपत़ा और बचियों को
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        मैंने भी उनसे सीख़ा और इसे ‘मन की   ि़ाहने व़ालों के चलए बहुत बड़ी ब़ात है।
        ब़ात’  में  श़ाचमल  चकय़ा।  ्ेखते-ही-्ेखत  े  प्रध़ानमत्री  जी  :  सुनील  जी  अब
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        ‘सेलिी चवि डॉिर’ एक गलोबल कैमपन   आपकी चबचिय़ाँ कैसी हैं, आजकल कय़ा
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        में ब्ल गय़ा और इसमें मुद़्ा सेलिी नहीं   कर रही हैं ?
        िी, िक्ोलॉजी नहीं िी, इसमें डॉिर को,   सुनील जी : जी मेरी बचिय़ाँ न्नी
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        बिी को प्रमुखत़ा ्ी गई िी। जीवन में   और य़ाचिक़ा हैं। एक 7th कल़ास में पढ़
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        बिी क़ा सि़ान चकतऩा बड़़ा होत़ा है, इस   रही है, एक 4th कल़ास में पढ़ रही है और
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