Page 15 - Mann Ki Baat Hindi
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लगटाने और देखभटाल करने कटा सटारटा खच्ष   तिसवीर,  नटाम,  उपयोग  और  डमलने  के
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          खुद उठटायटा है। जहटाँ जरूरति पड़ी, वहटा  ँ  स्थटान  की  जटानकटारी  ज्टाई।  उनकी
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          स्थटानीय लोगों, छटात्रों और नगर डनकटायों   ज्टाई गई जटानकटारी को वन डवभटाग न  े
          के  सटा्थ  डमलकर  कटाम  डकयटा।  उनके   संकडलति डकयटा और डकतिटाि के रूप में

          प्यटासों से सड़कों के डकनटारे हररयटाली   प्कटाडशति भी डकयटा। इस डकतिटाि में दी
          और िढ़ गई है।                      गई जटानकटारी अि researcher, छटात्रों
              सटाड्थयो, मधय प्देश में पन्नटा डजल  े  और वन अडधकटाररयों के िहति कटाम आ
                                                                 ु
          के जगदीश प्सटाद अडहरवटार जी, उनकटा   रही है।
          प्यटास  भी  िहति  ही  सरटाहनीय  है।  वो   साबियो,  पयात्तवरण  संरक्ण  की
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          जंगल  में  beat–guard  के  रूप  में   यही  भावना  आज  िड़े  सतर  पर  भी

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          अपनी सेवटाएँ दतिे हैं। एक िटार ग्ति के   बदखाई दे रही है। इसी सोच के साि
          दौरटान उनहोंने महसूस डकयटा डक जंगल में   देशभर  में  ‘एक  पेड़  माँ  के  नाम’
          मौजूद कई औरधीय पौधों की जटानकटारी   अबभयान  च्लाया  जा  रहा  है।  इस
          कहीं भी वयवकस्थति रूप से दज्ष नहीं है।   अबभयान  से  आज  करोड़ों  ्लोग  जुड़
          जगदीश जी, ये जटानकटारी अगली पीढ़ी   चुके हैं। अि तक देश में 200 करोड़

          तिक पहँचटानटा चटाहतिे ्थे, इसडलए उनहोंन  े  से ़जयादा पेड़ ्लगाए भी जा चुके हैं।
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          औरधीय पौधों की पहचटान करनटा और    ये  ितिटातिटा  है  डक  पयटा्षवरण  संरक्षण  को
          उनकटा  record  िनटानटा  शुरू  डकयटा।   लेकर अि लोग ़जयटादटा जटागरूक हैं, और
          उनहोंने  सवटा-सौ  से  ़जयटादटा  औरधीय   डकसी-नटा-डकसी रूप में अपनटा योगदटान
          पौधों  की  पहचटान  की।  हर  पौधे  की   देनटा चटाहतिे हैं।




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