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'मन की बाि' से टरीकाकरण


                   असभयान बना जन आन्ोलन




                                          च्य़ा है, जैस़ा पहले कभी नहीं ्ेख़ा गय़ा।
                                              कोचवड-19   वसशवक   मह़ाम़ारी
                                                         ै
                                          की  ्ूसरी  डेलि़ा  लहर  के  ्ौऱान  मुझ  े
                                          प्रध़ानमत्री  के  स़ाि  ब़ात  करने  क़ा
                                                ं
                                          अवसर चमल़ा ि़ा। वे सही अिषों में भचवष्य
                                          द्ष्ि़ा हैं, चजनहोंने इस स्ी में चवशव भर
                                          में  आए  सबसे  कच्न  मचडकल  संकि
                                                             े
                                                                    ु
                                          कोचवड-19  के  ्ौऱान  ्ेश  और  ्चनय़ा
                                                    ं
                                          क़ा अचग्म पसकत से नेतृतव चकय़ा। उनह  ें
             प्रोफ़ेसर डॉ. शश़ांक जोशी     भ़ारतीय चिचकतसकों और चवज़्ा़ाचनकों पर
            लील़ावती असपत़ाल मुमबई के     पूऱा भरोस़ा ि़ा।
         सल़ाहक़ार एवं इंचडयन कॉलेज ऑफ़        उनहोंने  और  उनकी  िीमों  ने
              फ़ीचजचशयंस के पूव्व डीन      मह़ाम़ारी  के  ्ौऱान  सम़ाज  के  हर  वग्व
                                          के लोगों को सुऩा, उनसे ब़ात की ति़ा
                                          उन सम़ाध़ानों को चवतररत करने की हर
                                          समभव कोचशश की, जो उस समय के
                                          चलए चवशेष रप से तैय़ार चकए गए िे और
                                                                  ु
            जन  भ़ागी़्ारी,  लोकतंत्र  क़ा  एक   भ़ारतीय आवशयकत़ाओं के अनरप िे।
                               ं
        महत्वपण्व  पहलू  है।  प्रध़ानमत्री  और   उनहोंने मुखय रप से कोचवड-19 व़ायरस
              ू
        उनकी नीचतयों क़ा केनद् चबन् एक ऐसी   और बीम़ारी के ब़ारे में चवचभन्न चमिक
                              ु
              ं
        िीम  इचडय़ा  तैय़ार  करऩा  रह़ा  है,  जो   ्ूर  करके  लोगों  के  मन  से  डर  खतम
                   ू
        चमलकर,  स़ामचहक  रप  से  चकसी  भी   करने पर धय़ान च्य़ा। उनहोंने मह़ाम़ारी
        िुनौती  क़ा  स़ामऩा  कर  सके  और  ्ेश   के ्ौऱान सभी सव़ासरय कचम्वयों, अचग्म
        को नई ऊँि़ाइयों पर ले ज़ा सके।  जन   मोिवे  के  क़ाचम्वकों  को  प्रोतस़ाचहत  चकय़ा
                                                    ु
        भ़ागी़्ारी जन संव़ा् के चबऩा अधूरी ह  ै  और यह भी सचनसशित चकय़ा चक पूऱा ्ेश
                     ं
        और यही प्रध़ानमत्री के ‘मन की ब़ात’   उनकी सऱाहऩा करे, मह़ाम़ारी के समय
        क़ा मुखय उद्शय है। ह़ाल में समपन्न हुए   में उनह प्रोतस़ाचहत करे।
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        ऱाष्ट्रीय सममलन ‘मन की ब़ात’ @100    उनहोंने सचनसशित चकय़ा चक भ़ारत
        में मुझे एक पैनल क़ा स्सय होने क़ा   अपनी ्व़ाएँ और िीके तैय़ार करने के
        अवसर  चमल़ा,  चजसमें  हमने  िि़ा्व  की   चलए आतमचनभ्वर हो। इस मह़ाम़ारी पर
        चक चकस प्रक़ार इस क्ऱासनतक़ारी रचडयो   केसनद्त भ़ारतीय स़ाक्य तैय़ार चकए गए।
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        क़ाय्वक्रम ने भ़ारत में श़ासन के प्रचत ्सष्ि   उनहोंने  चडचजिल  इचडय़ा  और  ससकल
                                                             ु
        को  एक  नय़ा  और  सक़ाऱातमक  मोड़   इचडय़ा क़ा उपयोग यह सचनसशित करन  े
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