Page 9 - Mann Ki Baat Hindi
P. 9
े
देखने को डमलटा है। यह वह क्षत्र है जो आनंद भी ले सकतिे हैं। एक प्कटार स े
सूखे की गमभीर समसयटा से जूझतिटा रहटा कहें तिो यहटाँ कटा पूरटा ecosystem डफर
है। यहटाँ की डमट्ी, लटाल और िलुई है। से डनखर उठटा है।
ं
यही वजह है डक लोगों को पटानी की कमी सटाड्थयो, आजमगढ़ हो, अनतिपुर
कटा सटामनटा करनटा पड़तिटा है। यहटाँ के कई हो, यटा डफर देश की कोई और जगह, य े
ं
ु
क्षेत्रों में लिे समय तिक िटाररश नहीं होतिी देखकर खुशी होतिी है डक लोग एकज्
ं
है। कई िटार तिो लोग अनतिपुर की तिुलनटा होकर कति्षवय भटाव से िड़े संकलप
रडगसतिटान में सूखे की कस्थडति से भी कर डसद् कर रहे हैं। जन-भटागीदटारी और
े
े
दतिे हैं। सटामडहकतिटा की यही भटावनटा हमटारे देश
ू
सटाड्थयो, इस समसयटा के समटाधटान की सिसे िड़ी तिटाकति है।
के डलये स्थटानीय लोगों ने जलटाशयों को मेरे पयारे देशवाबसयो, हमारे देश
सटाफ करने कटा संकलप डलयटा। डफर में भजन और कीतत्तन सबदयों से हमारी
प्शटासन के सहयोग से यहटाँ ‘अनति नीरू संसककृबत की आतमा रहे हैं। हमने मडदरों
ं
ं
े
संरक्षणम प्ोज््’ इसकी शुरुआति में भजन सुने हैं, क्थटा सुनतिे व्ति सुन े
हुई। इस प्यटास के तिहति 10 से अडधक हैं और हर दौर ने भक्ति को अपने समय
जलटाशयों को जीवनदटान डमलटा है। उन के डहसटाि से डजयटा है। आज की पीढ़ी
जलटाशयों में अि पटानी भरने लगटा है। भी कु्छ नए कमा्ल कर रही है। आज
इसके सटा्थ ही 7000 से अडधक पेड़ के युवाओं ने भककत को अपने अनुभव
भी लगटाए गए हैं। यटानी अनतिपुर में जल और अपनी जीवन-श्ली में ढा्ल बदया
ं
ै
संरक्षण के सटा्थ-सटा्थ green cover है। इसी सोच से एक नयटा सटांसककृडतिक
भी िढ़टा है। यहटाँ िच् अि तिैरटाकी कटा चलन उभर कर सटामने आयटा है। आपन े
े
9 9

